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गुना में देवदूत बने डॉ. सतीश राजपूत :खुद रक्तदान कर बचाई प्रसूता की जान, मां और बच्ची दोनों स्वस्थ

गुना जिले में डॉ. सतीश राजपूत ने खून की कमी से जूझ रही प्रसूता की जान बचाने के लिए खुद रक्तदान किया। गंभीर ऑपरेशन के बाद महिला और बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह घटना अस्पताल और आम लोगों में मानवता और डॉक्टर की जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बन गई है।
खुद रक्तदान कर बचाई प्रसूता की जान, मां और बच्ची दोनों स्वस्थ
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    गुना। मध्य प्रदेश के गुना जिले के जिला अस्पताल में मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक मिसाल सामने आई है। यहां पदस्थ डॉ. सतीश राजपूत ने न केवल एक जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, बल्कि खून की कमी से जूझ रही प्रसूता की जान बचाने के लिए खुद रक्तदान किया। इस घटना ने अस्पताल के कर्मचारियों और मरीजों के साथ-साथ आम लोगों का दिल भी जीत लिया।

    खून की कमी और गंभीर स्थिति में भर्ती हुई महिला

    बदरवास तहसील की 25 वर्षीय आदिवासी महिला वर्षा को 20 फरवरी को दोपहर करीब 3 बजे जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में भर्ती कराया गया था। यह उनकी तीसरी डिलीवरी थी और पहले दो ऑपरेशन होने के कारण उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी। डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया कि, उनके पुराने टांके और बच्चेदानी फटने का गंभीर खतरा था। साथ ही महिला के शरीर में खून की अत्यधिक कमी थी।

    ब्लड बैंक में नहीं मिला खून

    ऑपरेशन के लिए ‘ए पॉजिटिव’ रक्त की तत्काल आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल के ब्लड बैंक में खून उपलब्ध नहीं था। स्थिति नाजुक होने के कारण डॉ. सतीश राजपूत ने खुद आगे बढ़कर रक्तदान किया। डॉक्टर के इस साहसिक कदम के बाद ऑपरेशन सफल रहा और वर्षा ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

    रात में फिर आई मुश्किल

    ऑपरेशन के बाद भी खतरा समाप्त नहीं हुआ था। रात 11 बजे, जब डॉ. राजपूत ने दोबारा वार्ड का राउंड लिया, तो देखा कि मरीज को फिर से रक्तस्राव हो रहा है और बीपी गिर (Low) गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. राजपूत ने तुरंत रात में ब्लड बैंक जाकर फिर से रक्तदान किया। उनके इस कदम से वर्षा की जान बची और बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है।

    पूरी टीम का योगदान भी सराहनीय

    इस आपातकालीन स्थिति में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अशोक, डॉ. नितिन और डॉ. अंजली का सहयोग रहा। नर्सिंग स्टाफ सोनिया, विधि, सरोज, रूही, स्वीटी और वार्ड बॉय रजिया व धर्मवीर ने भी पूरी तत्परता से मरीज और ऑपरेशन में सहयोग किया।

    डॉक्टर का संदेश

    डॉ. सतीश राजपूत ने कहा कि, मरीज की जान बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। जब ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध नहीं था, तो एक चिकित्सक होने के नाते मुझे आगे आना ही पड़ा।

    मरीज और बच्ची दोनों स्वस्थ

    सफल ऑपरेशन और डॉक्टर की समय पर पहल के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। अस्पताल की यह घटना न केवल मानवता और समर्पण का प्रतीक है, बल्कि यह डॉक्टरों की जिम्मेदारी और पेशेवर ईमानदारी की भी मिसाल बन गई है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

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