Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

खुद पर फिदा हो रहे लोग :सोशल मीडिया के कारण नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के मामले आ रहे सामने

सोशल मीडिया के कारण आत्ममुग्धता का दौर है। हर कोई सोशल साइट्स पर खुद को बहुत सुंदर और बहुत स्मार्ट दिखाना चाहता है। ऐसे में नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के केस बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में लड़ाई-झगड़े और वैवाहिक जीवन में तलाक जैसे मामले सामने आ रहे हैं।
Follow on Google News
सोशल मीडिया के कारण नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के मामले आ रहे सामने
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रीति जैन, भोपाल। सोशल मीडिया ने 'मैं' को बनाया केंद्र-और इसी के साथ बढ़ रही है नार्सिसिज्म की प्रवृत्ति। लाइक्स, फॉलोअर्स और डिजिटल वैलिडेशन के इस दौर में 'खुद को बेहतर दिखाने' की होड़ कई युवाओं की मानसिकता को गहराई से प्रभावित कर रही है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ आत्मविश्वास है या फिर एक बढ़ती हुई मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति- नार्सिसिज्म। साइकॉलोजिस्ट्स का मानना है कि हर आत्मविश्वासी व्यक्ति नार्सिसिस्ट नहीं होता। फर्क इस बात में है कि क्या व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को समझ पाता है या नहीं। अगर कोई व्यक्ति आलोचना सहन नहीं कर पाता, हर चर्चा को अपने ऊपर केंद्रित कर देता है तो यह चेतावनी संकेत हो सकता है।  गंभीर स्तर पर इसे 'नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' कहा जाता है।

    धीमी रफ्तार से बढ़े फॉलोअर्स

    सोशल मीडिया पर एक युवती ने रील्स बनाना शुरू किया, लेकिन आत्ममुग्धता का आलम यह था कि शुरुआत में ही हैवी चार्ज करना शुरू कर दिया, जिससे अन्य के मुकाबले उनके फॉलोअर्स बहुत धीमी रफ्तार से बढ़े, क्योंकि ब्रांड ज्यादा अप्रोच नहीं कर रहे थे। उसे समझना पड़ा कि 50 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स होने पर ही हैवी अमाउंट चार्ज करना ठीक है लेकिन वो अपने प्रेजेंटेशन को बेस्ट मानती रही।

    रिश्ते आए लेकिन हर लड़की में कमी निकालता रहा युवक

    शादी के लिए एक कॉर्पोरेट में काम करने वाले लड़के के लिए कई रिश्ते आए, लेकिन वो हमेशा लड़कियों में कमी निकालता रहा। क्योंकि, उसे नहीं लगता था कि उनमें से कोई भी लड़की उसके साथ फोटोग्राफ्स में या जिंदगी में ठीक लगेगी।  वो खुद को ज्यादा खूबसूरत व परफेक्ट पर्सनालिटी समझता रहा। नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से ग्रस्त यह युवक काउंसलिंग के बाद माना को कोई परफेक्ट नहीं होता।

    वास्तविकता से अधिक दिखाने की कोशिश

    आज हर जगह खुद को साबित करने की होड़ है। ऐसे में कई बार व्यक्ति छवि को वास्तविकता से अधिक चमकदार बनाने की कोशिश करता है जो आत्मकेंद्रित व्यवहार को जन्म देता है।          

    मनीषा आनंद, कॉर्पोरेट ट्रेनर व इन्फ्लुएंसर

    लड़ाई-झगड़े की आशंका बढ़ जाती है

    गंभीर स्तर पर इसे 'नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' कहा जाता है, इसके लिए मनोचिकित्सकीय सहायता जरूरी होती है। ऐसे में तलाक, लड़ाई-झगड़े की आशंका बढ़ जाती है।

    डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts