भोपाल। राजधानी भोपाल में हाल ही में एक खास वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं में बढ़ते अपराध और गुस्से की समस्या पर चर्चा करना था। वर्कशॉप में यह बताया गया कि, कैसे कभी-कभी युवा गुस्से और भावनाओं के प्रभाव में आकर गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। अक्सर ऐसे मामलों में परिवार और समाज की अनदेखी भी बड़ी भूमिका निभाती है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि, एकतरफा प्यार, दबाव और तनाव के कारण युवा अपने परिवार और समाज की परवाह किए बिना गलत निर्णय ले लेते हैं। वर्कशॉप में छात्रों, युवाओं और उनके अभिभावकों को साथ में बुलाकर समझाया गया कि, गुस्से को नियंत्रित करना और आपराधिक गतिविधियों से बचना क्यों जरूरी है।
वर्कशॉप में मनोचिकित्सक डॉ. इना छाबड़िया ने बताया कि, आज के युवा अक्सर गुस्से और तनाव में आकर अपराध करने की ओर बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि, एकतरफा प्यार या दबाव में आने से कई बार युवा गंभीर गलती कर बैठते हैं, जिसका असर उनके पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है।
डॉ. इना ने कहा कि, युवाओं में भावनाओं का सही दिशा में उपयोग नहीं होना और मानसिक दबाव उनके अपराध करने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है। इस दौरान उन्होंने कई हाल की घटनाओं का उदाहरण भी दिया, जिनमें युवा अपनी सोच और गुस्से के चलते जानलेवा निर्णय कर बैठते हैं।
डॉ. इना ने यह स्पष्ट किया कि, बच्चों के मन की बात सुनना और उनके साथ समय बिताना बहुत जरूरी है। अगर माता-पिता अपने बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें और उनके भावनात्मक दबाव को समझें, तो युवा गुस्से और गलत ख्यालों को नियंत्रित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, जब बच्चे अपने माता-पिता से दूर रहते हैं और घर में उन्हें पर्याप्त ध्यान नहीं मिलता, तो उनके मन में गलत सोच और खतरनाक ख्याल पनपने लगते हैं। यही कारण है कि कई बार युवा अपराध की ओर बढ़ जाते हैं।
वर्कशॉप में यह भी बताया गया कि, एक छोटी सी बातचीत, नियमित देखभाल और समझदारी भरा मार्गदर्शन बच्चों को सही दिशा में रखने के लिए पर्याप्त हो सकता है।
वर्कशॉप में चर्चा के दौरान मध्य प्रदेश के हाल के उदाहरणों पर ध्यान दिया गया। अलग-अलग जिलों में एकतरफा प्यार और दबाव के चलते युवाओं द्वारा किए गए अपराधों की घटनाओं का उल्लेख किया गया।
डॉ. इना ने कहा कि, इन मामलों में सीधे तौर पर माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। अगर परिवार अपने बच्चों के विचारों और भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहे और नियमित संवाद बनाए रखे, तो युवा अपराध की ओर जाने से बच सकते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के बीच भावनाओं की समझ और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है। इससे अपराध और हिंसा की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
वर्कशॉप का एक मुख्य उद्देश्य युवाओं को गुस्से और तनाव को नियंत्रित करना सिखाना था। युवाओं को बताया गया कि जब उन्हें गुस्सा आए, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय, सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।
मनोचिकित्सक ने कहा कि, गुस्सा अक्सर झटके में लिए गए फैसलों का कारण बनता है। इसलिए युवाओं को यह सिखाया गया कि गुस्सा आने पर गहरी सांस लें, स्थिति को समझें और किसी भरोसेमंद व्यक्ति से सलाह लें। यह तरीका न केवल उनके लिए सुरक्षित है, बल्कि परिवार और समाज के लिए भी फायदेमंद है।
वर्कशॉप में यह बात भी जोर देकर कही गई कि अपराध केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इसलिए माता-पिता और समाज को चाहिए कि वे बच्चों के साथ समय बिताएं, उनके विचार और भावनाओं को समझें और उन्हें सही मार्गदर्शन दें।
डॉ. इना ने कहा, अगर युवा अपने परिवार और समाज से जुड़े हुए हैं और उन्हें सही दिशा में मार्गदर्शन मिलता है, तो वे आपराधिक गतिविधियों से दूर रहते हैं।