भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक नया संकल्प लिया है। वे न तो अब अपने स्वागत में फूल माला पहनेंगे और न ही स्मृति चिह्न लेंगे। उन्होंने एक कार्यक्रम में मंच से यह घोषणा की है कि उनका स्वागत करने वाले फूल मालाएं नहीं लाएं। उन्होंने कहा कि फूल मालाएं बहुत हो गई हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्मृति चिह्न भी भेंट करने से मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं व्यक्तिगत रूप से यह संकल्प ले रहा हूं।
चौहान ने स्मृति चिह्न को लेकर स्पष्ट किया किया कुछ लोग प्रेम करते हैं इसलिए लाते हैं लेकिन कुछ लोग यह सोचकर लाते हैं कि मंत्री हैं करना ही पड़ेगा। कई बार व्यक्ति को गलतफहमी हो जाती है कि मेरा स्वागत हो रहा, लेकिन वह उसका नहीं होता, वह पद का होता है। और जब पद पर नहीं रहता तो कोई पूछने वाला ही नही रहता। लेकिन कई बार हम गलतफहमी में जीते हैं।
चौहान ने कहा कि अब हम तय कर रहे हैं कि मेरा स्वागत करने आओ तो पेड़ लगाकार एक फोटो खींचकर ले आना और बता देना मामा यह पेड़ लगा दिया। उन्होंने कहा कि मैं स्मृति चिह्न नहीं लूंगा, फूलों की मालाओं की जरूरत नहीं है। आप पेड़ लगाकर फोटो ले आओ। उन्होंने कहा कि एक स्मृति चिह्न कम से कम 500 रुपए से कम में नहीं आता, बड़ा लिया तो और दाम लगते हैं। अब उस स्मृति चिह्न की कोई जरूरत ही नहीं है। अब 500 रुपए में 5 पेड़ लगा सकते हैं। कोई भी संस्था मेरा स्वागत करे, स्मृति चिह्न पूरी तरह से बंद।
आजकल स्वागत करने में पटका डालने का चलन हो गया है। और एक पटका भी करीब 500 रुपए में आता है। और पेड़ 100 150 रु. में तो आ ही जाएगा। पटका का गले में डालने के बाद उसका कोई उपयोग नहीं होता। शॉल तो गरीब को दे दो, लेकिन पटका का कोई उपयोग नहीं। गौरतलब है कि चौहान पांच साल से प्रतिदिन पेड़ लगाने का संकल्प पूरा कर रहे हैं।
पूर्व सीएम शिवराज सिंह की तरह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने स्वागत में मालाएं और गुलदस्ते लाने से मना किया है। भोपाल में ही आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि स्वागत में फूल मालाओं और गुलदस्तों लाने की जरूरत नहीं है। इनकी जगह फलों की टोकरी लाई जाए और कार्यक्रम के बाद वे फल आंगनबाड़ी या जरूतमंद बच्चों को दे दिए जाएं। इस तरह केंद्रीय मंत्रियों ने अलग स्वागत में पैसे की बर्बादी रोकने के उदाहरण पेश किए हैं।