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नया संकल्प :पूर्व सीएम शिवराज सिंह नहीं पहनेंगे माला, स्मृति चिह्न भी नहीं लेंगे, स्वागत करने वालों से मांगा एक खास गिफ्ट!

मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वागत में माला नहीं पहनने का निर्णय लिया है। चौहान ने एक कार्यक्रम में कहा कि जो भी उनका स्वागत करने आएं वे माला नहीं लाएं। उन्होंने कहा कि अब वे स्मृति चिह्न भी नहीं लेंगे। 
पूर्व सीएम शिवराज सिंह नहीं पहनेंगे माला, स्मृति चिह्न भी नहीं लेंगे, स्वागत करने वालों से मांगा एक खास गिफ्ट!
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल।  पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक नया संकल्प लिया है। वे न तो अब अपने स्वागत में फूल माला पहनेंगे और न ही स्मृति चिह्न लेंगे। उन्होंने एक कार्यक्रम में मंच से यह घोषणा की है कि उनका स्वागत करने वाले फूल मालाएं नहीं लाएं। उन्होंने कहा कि फूल मालाएं बहुत हो गई हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्मृति चिह्न भी भेंट करने से मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं व्यक्तिगत रूप से यह संकल्प ले रहा हूं।

    कुछ प्रेम से लाते हैं, कुछ लोग सोचते हैं मंत्री हैं करना पड़ेगा

    चौहान ने स्मृति चिह्न को लेकर स्पष्ट किया किया कुछ लोग प्रेम करते हैं इसलिए लाते हैं लेकिन कुछ लोग यह सोचकर लाते हैं कि मंत्री हैं करना ही पड़ेगा। कई बार व्यक्ति को गलतफहमी हो जाती है कि मेरा स्वागत हो रहा, लेकिन वह उसका नहीं होता, वह पद का होता है। और जब पद पर नहीं रहता तो कोई पूछने वाला ही नही रहता। लेकिन कई बार हम गलतफहमी में जीते हैं।

    ...बस पेड़ लगाकर फोटो ले आना 

    चौहान ने कहा कि अब हम तय कर रहे हैं कि मेरा स्वागत करने आओ तो पेड़ लगाकार एक फोटो खींचकर ले आना और बता देना मामा यह पेड़ लगा दिया। उन्होंने कहा कि मैं स्मृति चिह्न नहीं लूंगा, फूलों की मालाओं की जरूरत नहीं है। आप पेड़ लगाकर फोटो ले आओ। उन्होंने कहा कि एक स्मृति चिह्न कम से कम 500 रुपए से कम में नहीं आता, बड़ा लिया तो और दाम लगते हैं। अब उस स्मृति चिह्न की कोई जरूरत ही नहीं है। अब 500 रुपए में 5 पेड़ लगा सकते हैं। कोई भी संस्था मेरा स्वागत करे, स्मृति चिह्न पूरी तरह से बंद।

    आजकल पटका डालने का चलन, यह भी ठीक नहीं

    आजकल स्वागत करने में पटका डालने का चलन हो गया है। और एक पटका भी करीब 500 रुपए में आता है। और पेड़ 100 150 रु. में तो आ ही जाएगा। पटका का गले में डालने के बाद उसका कोई उपयोग नहीं होता। शॉल तो गरीब को दे दो, लेकिन पटका का कोई उपयोग नहीं। गौरतलब है कि चौहान पांच साल से प्रतिदिन पेड़ लगाने का संकल्प पूरा कर रहे हैं।

    शिक्षा मंत्री प्रधान ने भी मालाएं लाने का मना किया

    पूर्व सीएम शिवराज सिंह की तरह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने स्वागत में मालाएं और गुलदस्ते लाने से मना किया है। भोपाल में ही आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि स्वागत में फूल मालाओं और गुलदस्तों लाने की जरूरत नहीं है। इनकी जगह फलों की टोकरी लाई जाए और कार्यक्रम के बाद वे फल आंगनबाड़ी या जरूतमंद बच्चों को दे दिए जाएं। इस तरह केंद्रीय मंत्रियों ने अलग स्वागत में पैसे की बर्बादी रोकने के उदाहरण पेश किए हैं। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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