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गोवा में चिता जलाने के लिए नहीं थे पैसे, परिजनों ने श्मशान में लावारिस छोड़ा शव

गोवा में 65 वर्षीय अशोक विष्णु पालयेकर के अंतिम संस्कार के लिए परिवार के पास चिता की लकड़ी खरीदने तक के पैसे नहीं थे। बहनें शव को श्मशान घाट ले गईं, लेकिन पैसे न होने पर वहीं छोड़ना पड़ा।
गोवा में चिता जलाने के लिए नहीं थे पैसे, परिजनों ने श्मशान में लावारिस छोड़ा शव

पणजी। गोवा को देश के समृद्ध राज्यों में गिना जाता है, लेकिन यहां सामने आई एक घटना गरीबी की ऐसी तस्वीर दिखाती है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तरी गोवा के पेरनेम में एक परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां खरीदने तक के पैसे नहीं थे। मजबूरी में परिजन शव को श्मशान घाट में छोड़कर चले गए। अगले दिन पुलिस ने जब शव बरामद किया तो पूरे मामले की वजह सामने आई।

65 साल के अशोक की बीमारी से हुई मौत

मृतक की पहचान 65 वर्षीय अशोक विष्णु पालयेकर के रूप में हुई। वह उत्तरी गोवा के पेरनेम स्थित कासारवर्ने के देउलवाड़ा वार्ड में रहते थे। उनका घर करीब 20 वर्ग मीटर में बना एक छोटा सा ढांचा था। इसमें लेटराइट पत्थरों से बनी बिना प्लास्टर की दीवारें और दो कमरे थे। 13 सितंबर को गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर अशोक अपने घर में बीमार पड़ गए। परिवार ने उन्हें मुफ्त 108 एंबुलेंस से कासारवर्ने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद एक गार्ड के अनुसार, उनकी मौत को रजिस्टर में दर्ज तक नहीं किया गया था।

दो बहनों ने जुटाए पैसे, फिर श्मशान पहुंचाया शव

अशोक की दो बहनें विधवा हैं और पेरनेम के अलग-अलग गांवों में रहती हैं। दोनों का गुजारा गरीबों को मिलने वाली 2,000 रुपए प्रति माह की सरकारी पेंशन से होता है। दो साल पहले अशोक का एक पैर काटना पड़ा था। इसके बाद होटल की छोटी-मोटी नौकरी भी छूट गई। तब से उनकी बहनें बारी-बारी से उनकी देखभाल कर रही थीं। बहनों ने सुना था कि पेरनेम नगर पालिका के श्मशान घाट में गरीबों का मुफ्त अंतिम संस्कार किया जाता है। उन्होंने अपने पास बचे पैसे जुटाए और एक वाहन किराए पर लेकर अशोक का शव श्मशान घाट पहुंचाया।

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लकड़ी खरीदने के पैसे नहीं थे, शव छोड़ना पड़ा

देर शाम जब दोनों बहनें श्मशान पहुंचीं तो वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। उनके पास चिता के लिए लकड़ियां खरीदने के पैसे नहीं थे। शव को वापस ले जाने या किसी दूसरी जगह ले जाने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे। आखिरकार उन्होंने शव को वहीं छोड़ दिया। पुलिस ने बाद में इस मामले को समझा और पाया कि शव को श्मशान में छोड़ना किसी क्रूरता की वजह से नहीं था। परिवार को उम्मीद थी कि जिस अंतिम संस्कार का खर्च वह नहीं उठा पा रहा है, उसे सरकार की ओर से पूरा किया जाएगा।

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पुलिस ने परिवार को खोजा, रिश्तेदारों ने जुटाए पैसे

अगली सुबह पुलिस को श्मशान में शव मिला। शुरुआत में इसे लावारिस शव माना गया। पेरनेम पुलिस के सब-इंस्पेक्टर आदित्य गाड ने मामले की कड़ियां जोड़ते हुए कासारवर्ने स्थित अशोक के घर का पता लगाया और उनकी बहनों तक पहुंचे। पुलिस ने बहनों का पता लगाने के बाद शव उन्हें सौंप दिया। दूर के रिश्तेदारों ने पैसे इकट्ठा किए और अशोक का अंतिम संस्कार पणजी के सेंट इनेज श्मशान घाट में किया गया। पेरनेम के पुलिस इंस्पेक्टर नितिन हलर्णकर ने कहा कि किसी व्यक्ति को सम्मान के साथ अंतिम संस्कार मिलना चाहिए और ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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