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करौंदी गांव से निकली टेक क्रांति की कहानी!गांव के कमरे में बनी AI लैब, डिण्डौरी के युवा ने तैयार किया हिंदी-अंग्रेजी बोलने वाला ह्यूमनॉइड रोबोट

डिण्डौरी जिले के करौंदी गांव के युवा इंजीनियर शिवम साहू ने अपने घर के कमरे को AI लैब में बदलकर हिंदी-अंग्रेजी बोलने वाला ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया है। सीमित संसाधनों में बने इस इनोवेशन को ग्रामीण प्रतिभा की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गांव के कमरे में बनी AI लैब, डिण्डौरी के युवा ने तैयार किया हिंदी-अंग्रेजी बोलने वाला ह्यूमनॉइड रोबोट
डिण्डौरी के युवा ने तैयार किया हिंदी-अंग्रेजी बोलने वाला ह्यूमनॉइड रोबोट

मध्यप्रदेश के डिण्डौरी जिले के शहपुरा विकासखंड के करौंदी गांव से एक हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है। यहां के युवा इंजीनियर शिवम साहू ने अपने घर के एक छोटे से कमरे को ही आधुनिक AI लैब में बदल दिया और एक ऐसा ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया जो हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में बातचीत कर सकता है। यह रोबोट न सिर्फ इंसानी आवाज को पहचानता है बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सवालों को समझकर सटीक जवाब भी देता है।

बीटेक के बाद गांव लौटकर शुरू किया इनोवेशन का सफर

शिवम साहू ने जबलपुर के ज्ञानगंगा इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। नौकरी के लिए बड़े शहर जाने के बजाय उन्होंने अपने गांव में रहकर कुछ नया करने का फैसला लिया। इंटरनेट और सेल्फ-स्टडी के जरिए उन्होंने रोबोटिक्स और AI पर काम शुरू किया और धीरे-धीरे इस ह्यूमनॉइड रोबोट को विकसित किया।

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सीमित संसाधनों में तैयार किया हाईटेक रोबोट

इस प्रोजेक्ट में अब तक करीब एक लाख रुपये की लागत आई है। संसाधनों की कमी के बावजूद शिवम ने कई पार्ट्स खुद डिजाइन किए और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल कर जुगाड़ से समाधान निकाला। इससे पहले भी वे ड्रोन और कमांड-बेस्ड रोबोट बना चुके हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर काफी सराहना मिली थी।

आपदा और रक्षा क्षेत्र में उपयोगी AI रोबोट

शिवम का लक्ष्य ऐसे स्वायत्त रोबोट बनाना है जो आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, रक्षा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में इंसानों की मदद कर सकें। उनका कहना है कि अगर ग्रामीण युवाओं को सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें तो वे भी ग्लोबल स्तर की तकनीक विकसित कर सकते हैं।

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ग्रामीण प्रतिभा का बड़ा उदाहरण बना करौंदी गांव

यह नवाचार सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि ग्रामीण भारत की क्षमता का भी मजबूत उदाहरण बन गया है। सीमित संसाधनों के बावजूद शिवम साहू का यह प्रयास आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है जो साबित करता है कि जज्बा हो तो गांव से भी दुनिया बदलने वाली तकनीक बनाई जा सकती है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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