Garuda Purana:हर झूठ, हर छल, मौत के बाद यमलोक में होता है हर पाप का हिसाब, ये 12 नरक हैं पापियों के अंत का द्वार

गरुड़ पुराण के अनुसार मनुष्य का हर कर्म समय की धूल में खोता नहीं, बल्कि उसके साथ चलता है। कहा जाता है कि जब जीवन की अंतिम सांस थमती है, तब आत्मा के सामने उसके किए हुए हर छोटे-बड़े पाप जैसे जीवित हो उठते हैं। छल, झूठ, विश्वासघात, दूसरों का हक छीनना और निर्दोषों को पीड़ा देना, ये सब यमलोक के द्वार पर मौन गवाह बनकर खड़े हो जाते हैं। वहां न धन साथ देता है, न शक्ति, न कोई अपना, केवल कर्मों का हिसाब आत्मा के सामने खड़ा रहता है।
गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद आत्मा को मिलने वाली सजा और यमलोक के रहस्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें 12 ऐसे भयानक नरकों का उल्लेख मिलता है, जहां इंसान को उसके पापों और कर्मों के अनुसार दंड दिया जाता है। तो चलिए इसको विस्तार से जानते हैं।
- अंधतामिस्त्र (घोर अंधकारमय नरक)
ऐसे स्त्री-पुरुष जो रिश्तों को केवल स्वार्थ और भोग की वस्तु समझते हैं, उन्हें इस नरक का दंड मिलता है। यहां आत्मा भय और पीड़ा में भटकती रहती है। - अविसि (अत्यंत भयानक नरक)
झूठ बोलने और लोगों को धोखा देने वालों को यहां ऊंची जगह से नीचे गिराया जाता है। यह दंड बार-बार सहना पड़ता है। - असितापत्रम (धारदार चाकुओं का नरक)
जो लोग अपने कर्तव्यों से भागते हैं और गैरजिम्मेदार जीवन जीते हैं, उन्हें इस नरक में तेज धार वाले अस्त्रों से पीड़ा दी जाती है। - कुंभीपाकम (खौलते तेल वाला नरक)
स्वार्थ के लिए पशु-पक्षियों की हत्या करने वालों को यहां खौलते तेल में डाला जाता है। यह नरक क्रूरता का दंड माना गया है। - दुर्धर (कठिन, या शहन ना करने वाला नरक)
जो लोग गरीबों और असहायों से अत्यधिक ब्याज वसूलते हैं, उन्हें इस नरक में बिच्छुओं और विषैले जीवों के बीच रखा जाता है
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- महावीचि (रक्त से भरा भयानक नरक)
गौहत्या करने वालों को इस नरक में भेजा जाता है। यह स्थान रक्त और नुकीले कांटों से भरा हुआ बताया गया है। - तप्तमूर्ति (जलने वावा नरक)
गरुड़ पुराण में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, रत्न, सोना और धातुओं की चोरी करने वालों को इस नरक में अग्नि की भयंकर तपिश सहनी पड़ती है। यहां आत्मा को जलती हुई धातुओं के बीच रखा जाता है। - वैतरणी (नरक की नदी)
यह एक डरावनी नदी मानी जाती है, जिसमें रक्त, मल-मूत्र, विषैले जीव और आग की लपटें होती हैं। पापी आत्माओं को इस नदी को पार करना पड़ता है। - विलपक (नाश करने वाला नरक)
जो ब्राह्मण मदिरा का सेवन करते हैं, उन्हें इस नरक की अग्नि में जलने की पीड़ा झेलनी पड़ती है। - ललाभक्षम (वीर्य पीने वाला नरक)
बलात्कार और जबरदस्ती संबंध बनाने वालों के लिए यह नरक बताया गया है। यहां आत्मा को असहनीय यातनाएं दी जाती हैं। - कलसूत्रम (तपते लोहे की भूमि वाला नरक)
बड़ों का अपमान करने और उनका आदर न करने वालों को यहां आग जैसी गर्म भूमि पर रखा जाता है।
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- सुकरमुखम (कुचलने वाला नरक)
दूसरों को परेशान करने और अत्याचार करने वालों की आत्मा इस नरक में कष्ट झेलती है। यहां उन्हें अपमान और पीड़ा का सामना करना पड़ता है।











