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वन विभाग में पदोन्नति पर विवाद:आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप, SC-ST कर्मचारियों ने उठाए सवाल

वनकर्मियों ने सीसीएफ स्तर की पदोन्नति सूची आरक्षण प्रकिया का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया।
आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप, SC-ST कर्मचारियों ने उठाए सवाल
वनकर्मियों ने प्रमोशन सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए प्रमोशन सूची में सुधार की मांग को लेकर खंडवा में आवेदन सौंपा।

निमाड़ क्षेत्र के खंडवा, बुरहानपुर, बड़वाह और बड़वानी डिवीजन के वनकर्मियों ने हाल ही में जारी सीसीएफ स्तर की पदोन्नति सूची पर गंभीर आपत्ति जताई है। कर्मचारियों का आरोप है कि पदोन्नति प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग को केवल आरक्षित पदों तक सीमित रखा गया जबकि अनारक्षित कोटे का लाभ केवल सामान्य और ओबीसी वर्ग के कर्मचारियों को दिया गया। कर्मचारियों का दावा है कि अनारक्षित पदों पर सभी वर्गों के पात्र कर्मचारियों को वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति मिलनी चाहिए थी।

14 कंजरवेंसी में नियम लागू, खंडवा पर सवाल

वनकर्मियों का कहना है कि प्रदेश की 16 कंजरवेंसी में से 14 में पदोन्नति प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई लेकिन खंडवा कंजरवेंसी में नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के लिए वरिष्ठता सूची को नजरअंदाज किया गया जिससे कई पात्र कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह गए।

333 कर्मचारियों के प्रमोशन के बाद बढ़ा विवाद

वन वृत्त खंडवा के सीसीएफ वासु कनोजिया ने 13 जुलाई 2026 को दो अलग-अलग पदोन्नति आदेश जारी किए। पहले आदेश में 250 वनरक्षकों को वनपाल बनाया गया जबकि दूसरे आदेश में 83 वनपालों को डिप्टी रेंजर के पद पर पदोन्नति दी गई। कुल 333 कर्मचारियों के प्रमोशन के बाद यह विवाद सामने आया। कर्मचारियों का कहना है कि वर्ष 2003 बैच के कई कर्मचारी पात्र होने के बावजूद अब भी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।

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80 से अधिक SC-ST कर्मचारी प्रभावित होने का दावा

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम-2025 और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि अनारक्षित कोटे में वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाती तो SC-ST वर्ग के करीब 80 अतिरिक्त कर्मचारी भी पदोन्नति के दायरे में आते। उनका दावा है कि अब कई वरिष्ठ कर्मचारी अपने से 10-12 साल जूनियर अधिकारियों के अधीन काम करने को मजबूर होंगे। इस संबंध में वनरक्षक खंडवा वृत्त को लिखित आपत्ति और अभ्यावेदन भी सौंपा गया है।

वन कर्मचारी संघ ने क्या कहा?

वन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अमित मिश्रा ने बताया कि जारी पदोन्नति सूची में वरिष्ठता के अनुसार पात्र कर्मचारियों को पीछे कर अन्य कर्मचारियों को ऊपर स्थान दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे पहले जारी सूची भी निरस्त करनी पड़ी थी। ऐसे में कई कर्मचारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। संघ ने मांग की है कि जब तक विवाद का समाधान नहीं हो जाता तब तक पदभार ग्रहण (स्टार सेरेमनी) की प्रक्रिया रोकी जाए। उनके अनुसार इस विवाद से 96 वनरक्षक और वनपाल प्रभावित हुए हैं।

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CCF ने जांच का दिया भरोसा

इस मामले में सीसीएफ वासु कनोजिया ने कहा कि पदोन्नति के लिए सिफारिशें जिला वन अधिकारियों (DFO) स्तर की समितियों से प्राप्त हुई थीं। उन्होंने कहा कि अनारक्षित कोटे की व्याख्या समितियों ने किस आधार पर की, इसका जवाब वही दे सकती हैं। सूची जारी होने के बाद मिली शिकायतों की दोबारा जांच की जा रही है और कुछ मामलों का निराकरण भी किया जा चुका है।

Edited By: Sumit Shrivastava

Satyendra Thakur
By Satyendra Thakur

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