Garima Vishwakarma
24 Jan 2026
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (10 दिसंबर) को इंडिगो एयरलाइंस संकट पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि सरकार ने स्थिति बिगड़ने से पहले कदम क्यों नहीं उठाए और अन्य एयरलाइंस को 39-40 हजार रुपए तक किराया बढ़ाने की अनुमति कैसे मिल गई। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि आप इतने समय से कर क्या रहे थे?
कोर्ट ने कहा कि इंडिगो DGCA के नियमों के अनुसार सभी यात्रियों को मुआवजा दे। यदि नियमों में नुकसान की भरपाई का प्रावधान है, तो वह भी की जाए। मंत्रालय इसकी पूरी निगरानी करेगा।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया तुरंत शुरू होनी चाहिए।
कोर्ट ने याद दिलाया कि केंद्र सरकार के पास DGCA के आदेशों की समीक्षा करने का अधिकार है। सेक्शन 19 के तहत लाइसेंस या सर्टिफिकेट को प्रतिबंधित, निलंबित या रद्द किया जा सकता है। नियमों के उल्लंघन पर 2 साल तक की कैद, 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों को आगे कोई दिक्कत न हो। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त स्टाफ और पायलटों की भर्ती की जानी चाहिए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि जांच कमेटी बन चुकी है, इसलिए अभी अदालत इस संकट के कारणों पर कोई टिप्पणी नहीं करेगी। DGCA, केंद्र और कमेटी बिना कोर्ट की बातों से प्रभावित हुए स्वतंत्र रूप से निर्णय लें।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेदेला की बेंच PIL पर सुनवाई कर रही थी। PIL में इंडिगो संकट की स्वतंत्र न्यायिक जांच, फ्लाइट रद्द होने पर मुआवजा, और एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों को राहत देने की मांग की गई थी।
सरकार ने बताया कि वे FDTL (फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन) नियम लागू करना चाहती थी, जिसके लिए जुलाई और नवंबर में अंडरटेकिंग दी गई थी। कोर्ट ने DGCA पर कार्रवाई न करने को भी गंभीर माना।
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नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि इंडिगो के साथ-साथ DGCA की कार्यप्रणाली की भी जांच होगी। उन्होंने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
1 दिसंबर से अब तक इंडिगो की 4,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। दिल्ली एयरपोर्ट से रोजाना करीब 1.5 लाख यात्री यात्रा करते हैं, लेकिन संकट के चलते यह संख्या कम हो गई है। कारोबारी यात्रियों की कमी से दिल्ली का बिज़नेस माहौल भी प्रभावित हुआ है।