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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा-एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार को 1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के 37वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुईं।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डीजल और पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार को 1,00,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।
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एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार को 1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सिडबी के कार्यक्रम में।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताया है। सोमवार को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के 37वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत को खासतौर पर 3F यानी फ्यूल, फर्टिलाइजर और फॉरेन करेंसी पर फोकस करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए संतुलित और व्यावहारिक नीतियों पर काम कर रही है, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि प्रभावित न हो।

प्रधानमंत्री की अपील पर गुमराह कर रहे लोग

वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत की अपील को कुछ लोग गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, देश में भय और नकारात्मकता फैलाने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि भारत की आंतरिक आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों के बावजूद सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे आम लोगों और उद्योगों पर कम से कम असर पड़े।

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सरकार सतर्कता और संतुलन से आर्थिक फैसले ले रही

सीतारमण ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती का जिक्र करते हुए बताया कि इससे सरकार को करीब एक लाख करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के साथ खाद की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। इसके अलावा सोने के दाम बढ़ने से विदेशी मुद्रा पर भी दबाव बन रहा है। ऐसे में सरकार को बेहद सतर्कता और संतुलन के साथ आर्थिक फैसले लेने पड़ रहे हैं।

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सरकारी कंपनियां 45 दिन में एमएसएर्म का भुगतान करें

कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) की समस्याओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के करीब 8.1 लाख करोड़ रुपए के भुगतान अब तक लंबित हैं, जिससे छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी और विकास प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकारी कंपनियों से अपील की कि वे 45 दिन की तय समय-सीमा के भीतर एमएसएमई का भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि छोटे उद्योग आर्थिक दबाव से बाहर निकल सकें। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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