MP में महंगाई की नई लहर!कई शहरों में डीजल 100 रुपए पार, पेट्रोल ₹115 के करीब; इस महीने चौथी बार बढ़े दाम

भोपाल। मध्य प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने 25 मई को फिर ईंधन के दाम बढ़ा दिए। पेट्रोल में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही प्रदेश के कई शहरों में पेट्रोल 115 रुपए के करीब पहुंच गया है, जबकि डीजल 100 रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है।
11 दिनों के अंदर यह चौथी बढ़ोतरी है। 15 मई से अब तक पेट्रोल-डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। लगातार बढ़ते दामों का असर अब आम लोगों की जेब, परिवहन खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों पर साफ दिखाई देने लगा है।
भोपाल समेत बड़े शहरों में नए रेट
नई कीमतों के बाद राजधानी भोपाल में पेट्रोल 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर हो गया है। प्रदेश के बड़े शहरों में उज्जैन सबसे महंगा शहर बनकर सामने आया है।
MP के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट
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शहर |
पेट्रोल (रुपए/लीटर) |
डीजल (रुपए/लीटर) |
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भोपाल |
114.65 |
99.74 |
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उज्जैन |
115.03 |
100.11 |
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इंदौर |
114.54 |
99.57 |
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ग्वालियर |
114.76 |
99.85 |
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जबलपुर |
114.84 |
99.94 |
11 दिन में चौथी बार बढ़े दाम
मई महीने में तेल कंपनियों ने चार बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। हर बढ़ोतरी के साथ आम जनता पर महंगाई का दबाव बढ़ता गया।
इस महीने कब-कब बढ़े पेट्रोल-डीजल के रेट?
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तारीख |
बढ़ोतरी |
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15 मई 2026 |
करीब 3 रुपए प्रति लीटर |
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19 मई 2026 |
करीब 90 पैसे प्रति लीटर |
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23 मई 2026 |
87-91 पैसे तक |
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25 मई 2026 |
करीब 3 रुपए प्रति लीटर |
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डीजल महंगा होने से क्या पड़ेगा असर?
डीजल की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा असर बाजार और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ेगा।
1. मालभाड़ा बढ़ेगा
ट्रक और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। ट्रांसपोर्टर्स अगले कुछ दिनों में किराया बढ़ा सकते हैं।
2. खेती की लागत बढ़ेगी
ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपिंग सेट चलाने में किसानों का खर्च बढ़ेगा। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और अनाज की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
3. बस-ऑटो का किराया बढ़ सकता है
स्कूल बस, ऑटो और सार्वजनिक परिवहन के किराए में भी इजाफा होने की संभावना है। इससे रोज यात्रा करने वाले लोगों का मासिक खर्च बढ़ेगा।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह है। ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
तेल कंपनियों का कहना है कि, बढ़ती आयात लागत और रिफाइनिंग खर्च के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं।
कैसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत?
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। पेट्रोल-डीजल की कीमत तय होने में कई स्तर शामिल होते हैं।
पेट्रोल-डीजल का प्राइस ब्रेकडाउन
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हिस्सा |
प्रतिशत |
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क्रूड ऑयल और रिफाइनिंग |
45% |
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सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी |
25% |
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स्टेट टैक्स (VAT) |
20% |
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डीलर कमीशन |
10% |
नोट: अलग-अलग राज्यों में टैक्स दरें अलग होने के कारण कीमतों में भी अंतर होता है। मध्यप्रदेश में VAT ज्यादा होने से यहां ईंधन अन्य कई राज्यों की तुलना में महंगा मिलता है।
बेस प्राइस से कई गुना कैसे बढ़ जाती है कीमत?
पेट्रोल-डीजल उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं। कीमत तय होने की पूरी प्रक्रिया-
1. कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस)
अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए क्रूड ऑयल की कीमत।
2. रिफाइनिंग और कंपनियों का खर्च
कच्चे तेल को पेट्रोल-डीजल में बदलने की लागत और कंपनियों का मार्जिन।
3. केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी
केंद्र सरकार ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस लगाती है।
4. डीलर कमीशन
पेट्रोल पंप संचालकों का तय कमीशन जोड़ा जाता है।
5. राज्य सरकार का VAT
राज्य सरकारें अलग-अलग VAT लगाती हैं, जिससे हर राज्य में कीमत अलग होती है।
मार्च 2024 से स्थिर थे दाम
देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें मार्च 2024 से लगभग स्थिर थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सरकार ने 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर राहत दी थी। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और कंपनियों के बढ़ते घाटे के चलते दाम फिर बढ़ने लगे हैं।
तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है।
पूर्व CM कमलनाथ ने सरकार पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई रोकने के बजाय पूरा बोझ जनता पर डाल रही है। उन्होंने कहा कि, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं तब जनता को राहत नहीं दी गई, लेकिन अब लगातार कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।
आगे और महंगा हो सकता है ईंधन?
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी जारी रही, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर सीधे आम आदमी की जेब और देश की महंगाई पर पड़ेगा।











