Peoples Update Special :FIFA Fever : रात के फुटबॉल मैचों से बिगड़ी स्लीप साइकिल, ऑफिस-स्कूल में भारी पड़ रही नींद

इन दिनों पूरी दुनिया FIFA Fever की चपेट में हैं। लोग रात-रातभर जागकर ये फुटबॉल मुकाबले देख रहे हैं। कोई मैच रात 1.30 बजे से होता है तो कोई सुबह 5.30 बजे से। ऐसे में फुटबॉल फैंस की नींद उड़ी हुई है। डॉक्टर कहते हैं लगातार रात-रातभर जागने से शरीर और दिमाग दोनों पर असर पड़ेगा।
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FIFA Fever : रात के फुटबॉल मैचों से बिगड़ी स्लीप साइकिल, ऑफिस-स्कूल में भारी पड़ रही नींद
फाइल फोटो

लेखक : नवीन यादव, इंदौर। फुटबॉल प्रेमियों के लिए इन दिनों रातें छोटी और दिन लंबे हो गए हैं। 11 जून से शुरू हुए फीफा वर्ल्ड कप के अधिकांश मुकाबले भारतीय समयानुसार देर रात से लेकर सुबह तक हो रहे है। इंदौर में भी बड़ी संख्या में युवा, आईटी प्रोफेशनल, कॉलेज स्टूडेंट और खेल प्रेमी रातभर जागकर मैच देख रहे हैं। लेकिन इस जुनून की कीमत उनकी नींद, सेहत और अगले दिन की दिनचर्या चुका रही है। यहीं कारण है कि प्रभावित लोग डॉक्टरों के पास भी पहुंच रहे है।

लोगों को सिरदर्द और स्ट्रैस की समस्या हो रही

नींद पूरी नहीं होने से लोगों को सिरदर्द और स्ट्रैस की समस्या हो रही है। वर्ल्डकप अब अपने पूरे उफान पर है। अंतिम 16 के मैच भी शुरू ही होने वाले है। रात भर मैच देख कर सुबह ऑफिस पहुंचने वाले कर्मचारियों की आंखों में नींद साफ दिखाई दे रही है। देर रात तक मैच देखने के कारण कई लोगों की नींद रोज 3 से 4 घंटे तक सिमट गई है। नतीजा यह है कि दिनभर सुस्ती, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और काम में फोकस की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

केस-1 : वर्किंग शिफ्ट चेंज कराई

नाम: यश शर्मा,  उम्र :40,  टीम लीडर: आईटी कंपनी 

यश शर्मा ने बताया कि उनकी टीम में कुछ कर्मचारियों ने तो इन मैच के चक्कर में अपनी शिफ्ट ही चेंज करवा ली है। मैच खत्म होते-होते सुबह के चार-पांच बज जाते हैं, जबकि ऑफिस की शुरूआत सामान्य समय पर ही होती है। कई लोग कॉफी और एनर्जी ड्रिंक के सहारे दिन निकाल रहे हैं।

केस -2 : पूरी रात जागकर देखते हैं मैच

नाम: वैभव गुप्ता, उम्र :40 कर्मचारी : आईटी कंपनी

वैभव गुप्ता ने कहा कि उन्हें किक्रेट से ज्यादा फुटबॉल पंसद है। जब से फीफा वर्ल्ड कप शुरु हुआ है तब से ही वे पूरी रात मैच देख रहे है। इससे नींद पूरी नहीं हो रही और काम प्रभावित हो रहा है। काम के दौरान नींद आती है और माइंड अपसेट रहता है।

केस 3 : बच्चों के स्कूल से आई शिकायत

नाम : युवान यादव, छात्र,  उम्र: 12 साल

युवान यादव के पिता विकास ने बताया कि उनका बेटा रात को फीफा का कोई ऐसा मैच नहीं है जो युवान ने न देखा हो, सुबह 4 बजे तक मैच देखता है। स्कूल के लिए सुबह 7 बजे उठाते हैं तो बहुत परेशान करता है। स्कूल से हमें फोन भी आया कि युवान क्लास में नींद के झपके लेता है। वह फुटबॉल के लिए बहुत ज्यादा क्रेजी है। उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

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महत्वपूर्ण मैचों के लिए छुट्टी ली

हमारे एक कर्मचारी ने तो अभी से महत्वपूर्ण मैचों के दिनों के अगले दिन का अवकाश ले लिया है। जैसे जैसे फीफा वर्ल्डकप अपने अंत की तरफ बढ़ रहा है, फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह भी बढ़ रहा है।

रवि मीरचंदानी, दुकान संचालक, इंदौर

क्या कहते हैं विशेषज्ञ 

शरीर की बॉडी क्लॉक हो रही प्रभावित

मनोचिकित्सक डॉ कृष्णा मिश्रा ने बताया कि देर रात तक जागने से शरीर का प्राकृतिक स्लीप साइकिल बिगड़ने लगती है। इससे हार्मोनल संतुलन प्रभावित होता है, तनाव बढ़ता है और शरीर को पर्याप्त रिकवरी नहीं मिल पाती। यदि यह स्थिति लगातार कई सप्ताह तक बनी रहे तो हाई ब्लड प्रेशर, कमजोर इम्युनिटी, पाचन संबंधी समस्याएं, याददाश्त पर असर और मानसिक थकान जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। हमारे पास कई ऐसे केस आ रहे है। जिसमें मरीज को केवल नींद पूरी नहीं होने के कारण स्ट्रेस हो रहा है।

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By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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