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Peoples Update Special :भरण-पोषण के मामलों में महिलाएं पहुंच रहीं महिला आयोग, जून में पहुंचे भोपाल के 23 मामले

मध्यप्रदेश में राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के बाद महिलाओं का भरोसा एक बार फिर बढ़ने लगा है। कोर्ट की लंबी प्रक्रिया से बचने और विवाद को ज्यादा बढ़ाए बिना समाधान के लिए महिलाएं बड़ी संख्या में आयोग का रुख कर रही हैं। यही वजह है कि भरण-पोषण से जुड़े मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
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भरण-पोषण के मामलों में महिलाएं पहुंच रहीं महिला आयोग, जून में पहुंचे भोपाल के 23 मामले
महिलाएं पहुंच रहीं महिला आयोग

पल्लवी वाघेला, भोपाल। अकेले जून महीने में भोपाल जिले से भरण-पोषण के 23 मामले राज्य महिला आयोग पहुंचे। इनमें कई मामलों में सुनवाई कर तुरंत राहत दी गई, जबकि कुछ मामलों की सुनवाई इस माह प्रस्तावित है। आयोग पारिवारिक विवादों में समझाइश, काउंसलिंग और दोनों पक्षों के बीच संवाद के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। आयोग अध्यक्ष रेखा यादव का कहना है कि महिलाओं के सम्मान और अधिकार की रक्षा उनकी प्राथमिकता है।

भरण-पोषण के मामलों में बढ़ा महिला आयोग का रुख

कोर्ट की लंबी प्रक्रिया से बचने और विवाद को ज्यादा बढ़ाए बिना हल निकालने अब महिलाएं राज्य महिला आयोग का रुख कर रही हैं। मध्यप्रदेश में लंबे समय तक आयोग अध्यक्ष और सदस्यों के बिना संचालित हो रहा था, जिससे मामलों के त्वरित समाधान में परेशानी आ रही थी। अब नई नियुक्तियों के बाद महिलाओं का आयोग पर विश्वास फिर बढ़ने लगा है। यही कारण है कि भरण-पोषण जैसे मामले भी बड़ी संख्या में आयोग पहुंच रहे हैं। 

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ससुराल से निकाली गई महिला को मिली त्वरित राहत

बीते माह 11 जून को हुई जनसुनवाई में एक महिला अपने तीन बच्चों के लिए भरण-पोषण की मांग लेकर आयोग पहुंची। महिला ने बताया कि उसके रिटायर्ड पुलिसकर्मी ससुर ने उसे घर से निकाल दिया और सास, देवर, देवरानी सहित अन्य लोगों ने उसके साथ मारपीट भी की। पति को चार साल पहले ब्रेन ट्यूमर होने के बाद से ससुराल पक्ष का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। महिला ने बताया कि वह अपने बच्चों के साथ किराए के मकान में रहने को मजबूर है। मामले में आयोग ने परिवार को बुलाकर महिला को त्वरित आर्थिक राहत दिलाई और घर वापसी को लेकर काउंसलिंग भी शुरू कराई है।

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दूसरी शादी के बाद पति ने छोड़ा साथ 

एक अन्य मामले में पीड़िता ने आयोग को बताया कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। अब वह न तो पत्नी को अपने साथ रखना चाहता है और न ही बच्चों की जिम्मेदारी उठाने को तैयार है। महिला ने अपने और बच्चों के भरण-पोषण की मांग आयोग के सामने रखी। सुनवाई के लिए बुलाए जाने के बावजूद पति आयोग के सामने उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

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काउंसलिंग से परिवार को मिला मौका

भोपाल के एक उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से जुड़े मामले में पत्नी ने अपने और बेटे के लिए प्रतिमाह 40 हजार रुपये भरण-पोषण की मांग की। महिला ने पति पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और पत्नी को सम्मान नहीं देने का आरोप लगाया। आयोग ने दोनों पक्षों को बुलाकर संवाद कराया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। पति ने पत्नी को वापस घर ले जाने की इच्छा जताई, जबकि पत्नी ने भी कहा कि वह घर तोड़ना नहीं चाहती और तीन माह तक पति का व्यवहार देखकर आगे का निर्णय लेगी।

'महिलाओं के सम्मान और अधिकार हमारी प्राथमिकता'

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने कहा कि आयोग की प्राथमिकता पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाना है। मामला चाहे पारिवारिक विवाद का हो या कार्यस्थल से जुड़ा, महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। आयोग काउंसलिंग, संवाद और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से महिलाओं को त्वरित राहत देने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। नई नियुक्तियों के बाद आयोग की कार्यप्रणाली में भी तेजी आई है। इसका लाभ अब बड़ी संख्या में महिलाओं को मिल रहा है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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