PU Special :CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 18 विभागों में 3,161 मामले लंबित; 25 साल पुराने केस भी अटके

अशोक गौतम, भोपाल। सीएजी रिपोर्ट के अनुसार 18 विभागों में गबन, चोरी, हानि और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े 3,161 मामले अब तक लंबित हैं। इनमें 1,475 मामले 25 वर्ष से अधिक पुराने हैं, जबकि 61 प्रतिशत मामलों में जांच या विभागीय कार्रवाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। कई आरोपी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, कुछ की मृत्यु हो गई और कई मामलों में न्यायालय में अपील लंबित है। रिपोर्ट प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी धन की वसूली की धीमी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
18 विभागों में वर्षों से लंबित हैं हजारों मामले
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 18 विभागों में गबन, चोरी, हानि और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े 3,161 प्रकरण लंबित हैं। इन मामलों में करीब 40.24 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रभाव दर्ज किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि इनमें से 1,475 मामले 25 वर्ष से अधिक पुराने हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मामलों का न तो अंतिम निराकरण हो सका और न ही दोषियों की जवाबदेही तय हो पाई।
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जांच और विभागीय कार्रवाई में बरती गई सुस्ती
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार 61 प्रतिशत मामलों में आज भी जांच या विभागीय कार्रवाई अधूरी है। 1,384 प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें विभागीय और आपराधिक जांच शुरू ही नहीं की गई। वहीं 1,652 मामलों में विभागीय कार्रवाई शुरू होने के बावजूद संबंधित विभाग अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सके। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि समयबद्ध जांच और प्रभावी कार्रवाई के अभाव में वर्षों पुराने मामलों का समाधान लगातार टलता जा रहा है।
पुराने मामलों ने बढ़ाई जवाबदेही की चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक कार्रवाई लंबित रहने के कारण कई आरोपी अधिकारी और कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। कुछ कर्मचारियों की मृत्यु हो गई, कई सेवा छोड़ चुके हैं और अनेक मामलों में न्यायालयों में अपील लंबित है। ऐसी स्थिति में सरकारी धन की वसूली प्रभावित हुई है। साथ ही दोषियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया भी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कई विभागों में करोड़ों की अनियमितता
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 2,621 प्रकरण वन विभाग में दर्ज हैं, जिनमें 1,725.32 लाख रुपए का वित्तीय प्रभाव शामिल है। सिंचाई विभाग में केवल 11 मामले हैं, लेकिन उनसे जुड़ी राशि 830.44 लाख रुपए है। स्कूल शिक्षा विभाग में 92 प्रकरण लंबित हैं, जिनमें 693.62 लाख रुपए का वित्तीय प्रभाव है। वहीं पुलिस विभाग में 323 मामले दर्ज हैं, जिनकी राशि 404.63 लाख रुपए बताई गई है। रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग विभागों में वर्षों से लंबित इन मामलों का निराकरण अब भी नहीं हो सका है।
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वर्षों के हिसाब से लंबित मामलों की तस्वीर
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार 0 से 5 वर्ष पुराने 262 प्रकरण लंबित हैं, जिनमें 321.90 लाख रुपए का वित्तीय प्रभाव है। 5 से 10 वर्ष की अवधि के 659 मामलों में 773.18 लाख रुपए, 10 से 15 वर्ष पुराने 471 मामलों में 1,716.54 लाख रुपए, 15 से 20 वर्ष पुराने 114 मामलों में 426.66 लाख रुपए और 20 से 25 वर्ष पुराने 180 मामलों में 143.57 लाख रुपए की वित्तीय अनियमितता दर्ज है। सबसे चिंताजनक स्थिति 25 वर्ष से अधिक पुराने 1,475 मामलों की है, जिनमें 641.92 लाख रुपए का वित्तीय प्रभाव शामिल है। कुल मिलाकर 3,161 मामलों में 4,023.77 लाख रुपए यानी लगभग 40.24 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रभाव दर्ज किया गया है। यह आंकड़े वर्षों से लंबित जांच और कार्रवाई की धीमी रफ्तार को उजागर करते हैं।












