नकली प्लास्टर कांड में जांच तेज: इलाज के रिकॉर्ड जब्त, गिरफ्तारी से जेल तक की पूरी प्रक्रिया खंगाल रही पुलिस

20 हजार रुपये लेकर नकली पट्टा बंधवाने के आरोपों की भी जांच, निजी अस्पताल के डॉक्टर से पूछताछ के बाद बदली जांच की दिशा
 इलाज के रिकॉर्ड जब्त, गिरफ्तारी से जेल तक की पूरी प्रक्रिया खंगाल रही पुलिस
प्लास्टर चढ़ा कर जुलूस निकाला ,फिर जेल में प्लास्टर उतार दिया

इंदौर। हीरानगर थाना क्षेत्र में तोड़फोड़ के आरोपियों  को कथित रूप से नकली प्लास्टर बांधकर जुलूस निकालने के मामले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। निजी अस्पताल के डॉक्टर के बयान दर्ज होने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब पुलिस अधिकारी आरोपियों  की गिरफ्तारी से लेकर कोर्ट में पेशी और जेल दाखिले तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कर रहे हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों पर लगे 20 हजार रुपये लेकर नकली प्लास्टर बंधवाने के आरोपों की भी जांच शुरू कर दी गई है।

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मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब हीरानगर थाना पुलिस ने कार में तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप में मयंक और शोभित को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दावा किया था कि दोनों आरोपियों  के हाथ-पैर में फ्रैक्चर है। इसके बाद आरोपियों  को प्लास्टर बंधी हालत में इलाके में घुमाया गया और उनका जुलूस निकालते हुए तस्वीरें भी सामने आई थीं।

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अगले दिन सेंट्रल जेल ले जाते समय भी आरोपियों  के हाथों में प्लास्टर दिखाई दिए, जबकि वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी उन्हें डंडों से पीटते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठे और पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच जोन-3 के डीसीपी अभिषेक रंजन को सौंप दी।

 

 

जांच के दौरान एडीसीपी ओमप्रकाश ने एसीपी रुबिना मिजवानी, टीआई सुशील पटेल, एएसआई दिनेश त्रिपाठी समेत कई पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए। पूछताछ में थाना प्रभारी ने आरोपियों  से मारपीट किए जाने से इनकार करते हुए कहा कि दोनों पहले से घायल थे और उनका उपचार क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में कराया गया था। बाद में गिरफ्तारी के उपरांत उनकी एमवाय अस्पताल में मेडिकल लीगल जांच (एमएलसी) भी कराई गई थी।

डॉक्टर से पूछताछ, इलाज के दस्तावेज जब्त

गुरुवार को जांच अधिकारी ने संबंधित निजी अस्पताल के डॉक्टर को बुलाकर पूछताछ की और उपचार से जुड़े रिकॉर्ड जब्त कर लिए। डॉक्टर ने स्वीकार किया कि आरोपियों  का इलाज उनके अस्पताल में हुआ था, लेकिन उन्होंने उपचार के दौरान किसी पुलिसकर्मी की मौजूदगी से इनकार किया। डॉक्टर के इस बयान के बाद जांच की दिशा बदल गई है और अब पुलिस उपचार की पूरी प्रक्रिया तथा उससे जुड़े तथ्यों का भी सत्यापन कर रही है।

20 हजार रुपये लेकर नकली प्लास्टर बंधवाने का आरोप

वायरल वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने 20 हजार रुपये लेकर आरोपियों  के हाथ-पैर पर नकली प्लास्टर बंधवाए, ताकि उन्हें घायल दिखाया जा सके। आरोप यह भी है कि पिटाई नहीं करने और हाथ-पैर नहीं तोड़ने के बदले रुपये लिए गए तथा दिखावे के लिए प्लास्टर लगवाकर क्षेत्र में जुलूस निकाला गया। वीडियो में यह दावा भी किया गया कि सेंट्रल जेल पहुंचने के बाद आरोपियों  ने सिपाही जफर के सामने प्लास्टर उतारकर फेंक दिए।

 

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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