फर्जी क्राइम ब्रांच चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, महिला वकील निकली मास्टरमाइंड

भोपाल। मिसरोद पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को रोकते और एमडी ड्रग्स जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी देकर उनसे पैसे और सामान छीन लेते थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गिरोह तक पहुंच बनाई। जांच में महिला मास्टरमाइंड के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आए हैं। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश के साथ पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी हुई है।
फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को बनाते थे निशाना
भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र में सक्रिय यह गिरोह खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर लोगों को रोकता था। आरोपी ऐसे लोगों की तलाश में रहते थे जिन्हें आसानी से डराया जा सके। व्हाइट स्कॉर्पियो में घूमते हुए वे राह चलते लोगों से पूछताछ शुरू कर देते और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में ले आते। इसके बाद उनसे नकदी और कीमती सामान छीनकर मौके से फरार हो जाते। शुरुआती जांच में पुलिस को इस गिरोह के सुनियोजित तरीके से वारदात करने के कई अहम सुराग मिले हैं।
एमडी ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देकर करते थे लूट
पुलिस के अनुसार गिरोह ने एक युवक को रोककर खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और उससे सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी। आरोपियों ने युवक को धमकाया कि उसके खिलाफ एमडी ड्रग्स से जुड़ा मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया जाएगा। कार्रवाई के डर से युवक पूरी तरह घबरा गया और आरोपियों ने इसी स्थिति का फायदा उठाकर उससे लूटपाट कर ली। इतना ही नहीं, आरोपी उसका पीछा करते हुए उसकी कॉलोनी तक पहुंच गए।
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ाए आरोपी
घटना की शिकायत मिलने के बाद मिसरोद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिसमें संदिग्ध स्कॉर्पियो और आरोपियों की एक्टिविटी सामने आईं। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई व्हाइट स्कॉर्पियो भी बरामद की गई है।
महिला वकील ने तैयार की थी पूरी साजिश
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि गिरोह की मास्टरमाइंड एक महिला है, जो खुद को वकील बताती थी। पुलिस के मुताबिक उसी ने फर्जी पुलिस बनकर लोगों को डराने और लूटने की पूरी योजना तैयार की थी। पूछताछ में यह भी सामने आया कि महिला कानून की जानकारी का इस्तेमाल लोगों को भ्रमित करने और अपने साथियों को निर्देश देने में करती थी। पुलिस उसके संपर्कों और गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी आए सामने
पुलिस जांच में महिला आरोपी के खिलाफ पहले से मारपीट और चाकूबाजी जैसे मामलों में मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। अधिकारियों का मानना है कि गिरोह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकता है। एडीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि चार आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। वहीं दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।












