Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Eye of the Sahara:सहारा के रेगिस्तान में दिखती ‘धरती की आंख’, जानिए कैसे बनी यह रहस्यमयी आकृति

अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में मौजूद आई ऑफ द सहारा एक विशाल गोलाकार प्राकृतिक संरचना है, जो लगभग 40 किलोमीटर चौड़ी है और अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है। लंबे समय तक इसे उल्कापिंड या रहस्यमयी घटना माना गया, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती की अंदरूनी हलचल और करोड़ों सालों के प्राकृतिक कटाव से बनी एक अनोखी भू-आकृति है।
सहारा के रेगिस्तान में दिखती ‘धरती की आंख’, जानिए कैसे बनी यह रहस्यमयी आकृति
Eye of the Sahara

सहारा रेगिस्तान। अफ्रीका के विशाल सहारा रेगिस्तान के बीच एक ऐसी रहस्यमयी और अनोखी संरचना मौजूद है, जो पहली नजर में किसी इंसान की आंख जैसी दिखाई देती है। लगभग 40 किलोमीटर चौड़ी यह गोलाकार आकृति अंतरिक्ष से भी साफ नजर आती है और लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए जिज्ञासा का विषय बनी हुई है। कभी इसे उल्कापिंड का गड्ढा माना गया, तो कभी रहस्यमयी घटना, लेकिन अब वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है, जिसे धरती के अंदरूनी बदलाव और करोड़ों सालों के कटाव ने मिलकर आकार दिया है।

अंतरिक्ष से दिखने वाली अनोखी बनावट

अफ्रीका के विशाल सहारा रेगिस्तान के बीच एक ऐसी अद्भुत आकृति मौजूद है, जिसे देखकर पहली नजर में कोई भी चौंक सकता है। यह जगह ऊपर से देखने पर बिल्कुल इंसान की आंख जैसी दिखाई देती है। यही वजह है कि इसे आई ऑफ द सहारा कहा जाता है। लगभग 40 किलोमीटर चौड़ी यह संरचना इतनी साफ और बड़ी है कि अंतरिक्ष से भी आसानी से देखी जा सकती है। अंतरिक्ष यात्री इसे लंबे समय से एक पहचान चिन्ह के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं।

मॉरिटानिया में स्थित है यह अनोखा प्राकृतिक ढांचा

यह रहस्यमयी आकृति अफ्रीका के मॉरिटानिया देश में स्थित है। इसे वैज्ञानिक भाषा में रिचट स्ट्रक्चर कहा जाता है। इस जगह की गोलाकार बनावट और अलग अलग परतें इसे बाकी रेगिस्तान से अलग बनाती हैं। दूर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे कोई विशाल आंख आसमान की ओर देख रही हो।

उल्कापिंड के गिरने से बनी

कई सालों तक वैज्ञानिकों के बीच यह धारणा बनी रही कि यह आकृति किसी बड़े उल्कापिंड के गिरने से बनी होगी। इसकी गोल और सटीक संरचना देखकर यह अनुमान लगाना आसान था। लोगों को लगता था कि किसी भारी पत्थर ने धरती से टकराकर यह बड़ा गड्ढा बना दिया होगा लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इस जगह का गहराई से अध्ययन किया, तो यह धारणा गलत साबित हुई। NASA और अन्य भू-वैज्ञानिकों ने यहां जांच की, लेकिन उन्हें उल्कापिंड टकराने के कोई सबूत नहीं मिले। न तो वहां पिघली हुई चट्टानें मिलीं और न ही किसी बाहरी टक्कर के निशान। इससे साफ हो गया कि यह आकृति किसी अंतरिक्षीय घटना का परिणाम नहीं है।

ये भी पढ़ें: गंगा में कुत्ते को नहलाया! चेतावनी के बाद भी नहीं मानी महिला, श्रद्धालुओं का फूटा गुस्सा

धरती के अंदर की प्रक्रिया

वैज्ञानिकों के अनुसार यह संरचना पूरी तरह प्राकृतिक है और इसका निर्माण धरती के अंदर होने वाली हलचल से हुआ है। लाखों साल पहले जमीन के नीचे मौजूद चट्टानों की परतें धीरे धीरे ऊपर उठीं और एक गुंबद जैसी आकृति बन गई। यह प्रक्रिया बहुत लंबे समय तक चलती रही। इसके बाद हवा, बारिश और मौसम के असर ने इस गुंबद को धीरे धीरे घिसना शुरू किया। इस प्रक्रिया को डिफरेंशियल इरोजन कहा जाता है, जिसमें अलग अलग प्रकार की चट्टानें अलग अलग गति से टूटती और घिसती हैं। जो चट्टानें कमजोर थीं, वे जल्दी खत्म हो गईं, जबकि मजबूत चट्टानें बची रहीं। इसी वजह से वहां गोल गोल घेरों की परतें बन गईं। यही परतें मिलकर आज एक आंख जैसी आकृति बनाती हैं। इस संरचना के बीच में पुरानी चट्टानें हैं, जबकि बाहर की ओर नई परतें मौजूद हैं। यह पूरी प्रक्रिया करोड़ों सालों में पूरी हुई है।

सहारा सिर्फ रेगिस्तान नहीं

अक्सर लोग सहारा को केवल बंजर और सूखा इलाका मानते हैं लेकिन इसका महत्व इससे कहीं ज्यादा है। यह रेगिस्तान पूरी दुनिया के पर्यावरण को प्रभावित करता है। यह धूल अमेजन वर्षावन तक पहुंचती है और वहां के जंगलों को पोषण देती है। इसमें मौजूद फॉस्फोरस जैसे तत्व पेड़ पौधों के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इस तरह सहारा का यह सूखा इलाका भी दूसरे हिस्सों में हरियाली बनाए रखने में मदद करता है।

ये भी पढ़ें: UJJAIN: महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद पर सख्ती, FSSAI 5 स्टार रेटिंग वाले प्रसाद पर गड़बड़ी पर 25 लाख तक जुर्माना

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

Latest Posts