पुणे में 4 साल की मासूम से दरिंदगी के बाद हत्या,CM फडणवीस का ऐलान - फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरापुर इलाके में एक 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और फिर उसकी हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के सामने आने के बाद से गांव में मातम और गुस्से का माहौल एक साथ दिखाई दे रहा है। इस घटना को लेकर समाज के हर वर्ग में गहरा आक्रोश और पीड़ा देखने को मिल रही है। घटना के बाद ग्रामीणों ने खुद आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। इसके बावजूद लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और देर रात तक प्रदर्शन, घेराव और सड़क जाम जैसे हालात बने रहे।
सीएम फडणवीस ने दिया बड़ा भरोसा
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सामने आकर कहा कि पीड़ित बच्ची बहुत छोटी है, यह बेहद दुखद और असहनीय घटना है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। हम सुनिश्चित करेंगे कि दोषी को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिले। सीएम ने यह भी बताया कि मामले में एक विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया जाएगा ताकि केस मजबूत तरीके से पेश हो सके और न्याय में देरी न हो।
आरोपी का पुराना रिकॉर्ड भी आया सामने
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी कोई पहली बार अपराध करने वाला नहीं है। पुणे ग्रामीण के एसपी संदीप सिंह गिल के अनुसार आरोपी दिहाड़ी मजदूर है और पहले भी उसके खिलाफ दो मामले दर्ज हो चुके हैं। एक मामला साल 1998 में छेड़छाड़ का था, जबकि 2015 में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था, हालांकि उसमें वह बरी हो गया था। इस खुलासे के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पहले ही सख्त कार्रवाई हुई होती तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी।
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घटना वाले दिन क्या-क्या हुआ
शुक्रवार को हुई इस दिल दहला देने वाली वारदात का घटनाक्रम बेहद तेजी से सामने आया। दोपहर करीब 3 बजे बच्ची को नसरापुर के राम मंदिर इलाके के पास आखिरी बार देखा गया था। जब वह 3:45 बजे तक घर नहीं लौटी तो उसकी नानी को चिंता हुई और उन्होंने तलाश शुरू की। देखते ही देखते 4 बजे तक गांव के लोग भी खोज में जुट गए। करीब 4:30 बजे सीसीटीवी फुटेज में आरोपी बच्ची को एक तबेले की ओर ले जाता हुआ दिखा, जिसके बाद शक गहरा गया। ग्रामीणों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शाम 5:30 बजे बनेश्वर फाटा के पास आरोपी को पकड़ लिया। लेकिन असली झटका तब लगा जब करीब 6 बजे उसी तबेले में गोबर के ढेर के नीचे से बच्ची का शव बरामद हुआ।
इस भयावह खुलासे के बाद गांव में गुस्सा फूट पड़ा। शाम 7 बजे नाराज लोगों ने पुलिस का घेराव कर दिया और 8 बजे तक राजगड पुलिस स्टेशन के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। मामला बढ़ता गया और रात 9 बजे बेंगलुरु हाईवे पर 'रास्ता रोको' आंदोलन शुरू कर दिया गया। हालात तब काबू में आए जब रात करीब 11 बजे एसपी संदीप सिंह गिल मौके पर पहुंचे और लोगों को लिखित आश्वासन दिया कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, जिसके बाद चक्काजाम खत्म हुआ।
अगले दिन भी जारी रहा विरोध
शनिवार सुबह होते ही नसरापुर में 'गांव बंद' का ऐलान कर दिया गया। बाजार बंद रहे और लोग सड़कों पर उतर आए। भैरवनाथ मंदिर से एक बड़ा विरोध मोर्चा निकाला गया। इस दौरान स्थानीय विधायक शंकर मांडेकर और पूर्व विधायक संग्राम थोपटे मौके पर पहुंचे और लोगों को भरोसा दिलाया कि केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। बाद में विधायक रोहित पवार भी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। नेताओं के आश्वासन के बाद कुछ समय के लिए स्थिति शांत हुई, लेकिन लोगों का गुस्सा अब भी कम नहीं हुआ है।
क्या होता है फास्ट ट्रैक कोर्ट
देश में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरूआत महिला अपराध में शामिल दोषियों को देने से हुई थी। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए सरकार ने आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम-2018 के जरिए रेप के अपराधियों के लिए मौत की सजा जैसे कड़ी सजा का प्रावधान किया है। पीड़ितों को तत्काल न्याय देने के लिए ही अक्टूबर-2019 से न्याय विभाग ने यौन अपराधों से संबंधित मामलों की जल्द सुनवाई के लिए देश भर में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTC ) के साथ ही विशिष्ट पॉक्सो न्यायालयों की स्थापना के लिए एक केंद्र प्रायोजित योजना लागू की है। जानकारी के मुताबिक हर फास्ट ट्रैक कोर्ट में एक न्यायिक अधिकारी और सात सदस्य कर्मचारियों का प्रावधान किया गया है। अभी देश के कुल 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है।












