1000 कार चोरी करने वाला हाईटेक गैंग बेनकाब,सरकारी कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड; VAHAN पोर्टल से कराते थे फर्जी रजिस्ट्रेशन

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह को दबोचा है जिसने वाहन चोरी की दुनिया में तहलका मचा रखा था। अब तक 1000 से ज्यादा गाड़ियां बेच चुके इस सिंडिकेट ने तकनीकी और सरकारी सिस्टम की खामियों का बखूबी फायदा उठाया। यह महज एक चोर गिरोह नहीं, बल्कि एक कॉर्पोरेट स्टाइल में चलने वाला सिंडिकेट था, जो चोरी की गाड़ियों को इस तरह नई पहचान देता था कि खरीदार को शक तक नहीं होता था।
एक चोरी से खुला पूरा नेटवर्क
पूरे मामले की शुरुआत 5 अगस्त 2025 को पीतमपुरा इलाके से हुई, जहां से एक क्रेटा कार चोरी हुई थी। शुरुआत में यह एक सामान्य चोरी का मामला लग रहा था, लेकिन जब क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने जांच आगे बढ़ाई, तो एक-एक कर कई चौंकाने वाली कड़ियां सामने आने लगीं। जांच में पता चला कि यह गिरोह सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ था। पुलिस ने इस केस में मास्टरमाइंड दमनदीप सिंह उर्फ लकी समेत कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पंजाब से कंट्रोल होता था पूरा सिंडिकेट
पुलिस के अनुसार, इस पूरे गिरोह का संचालन दमनदीप सिंह उर्फ लकी करता था, जो पंजाब से बैठकर पूरे नेटवर्क को कंट्रोल और फाइनेंस करता था। अलग-अलग राज्यों में उसके लोग तैनात थे, जो चोरी से लेकर बिक्री तक हर काम संभालते थे। इस तरह यह गिरोह एक कंपनी की तरह काम कर रहा था, जहां हर सदस्य की जिम्मेदारी तय थी और पूरा सिस्टम बेहद व्यवस्थित तरीके से चलता था।
ये भी पढ़ें: RBI: रोहित जैन बने नए डिप्टी गवर्नर, 3 साल का रहेगा कार्यकाल
ऐसे बदली जाती थी गाड़ियों की पहचान
गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर और प्लानिंग के साथ तैयार किया गया था। सबसे पहले गैंग के सदस्य महंगी और लग्जरी गाड़ियों को निशाना बनाते थे। चोरी के बाद गाड़ियों को ऐसे लोगों के पास भेजा जाता था, जो चेसिस नंबर और इंजन नंबर बदलने में माहिर थे। प्रदीप सिंह जैसे एक्सपर्ट गाड़ी की असली पहचान मिटाकर उसे पूरी तरह नई बना देते थे। इसके बाद अरविंद शर्मा नाम का आरोपी फर्जी दस्तावेज तैयार करता था, जिसमें बैंक की नकली एनओसी और अन्य कागजात शामिल होते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर गाड़ी को वैध दिखाया जाता था।
VAHAN पोर्टल का गलत इस्तेमाल
इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग है। जांच में सामने आया कि हिमाचल प्रदेश का एक सरकारी कर्मचारी सुभाष चंद इस गिरोह का अहम हिस्सा था। उसने VAHAN portal का गलत इस्तेमाल करते हुए फर्जी ओटीपी और लॉगिन के जरिए 350 से ज्यादा गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन असली की तरह कर दिया। इस वजह से जब ये गाड़ियां बाजार में बेची जाती थीं, तो कोई भी खरीदार यह समझ ही नहीं पाता था कि वह चोरी की गाड़ी खरीद रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यही वजह थी कि यह गिरोह लंबे समय तक बिना पकड़े अपना नेटवर्क चलाता रहा।
छापेमारी में बरामद हुई लग्जरी गाड़ियां
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के कब्जे से 31 लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। इनमें फॉर्च्यूनर, इनोवा, थार, स्कॉर्पियो और क्रेटा जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल सिर्फ बेचने तक सीमित नहीं था, बल्कि कई बार इन्हें बड़े अपराधों जैसे ड्रग्स तस्करी में भी इस्तेमाल किया जाता था।











