SIR पर चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में जवाब, कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए

चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने फॉर्म-6 में बदलाव करने के आरोपों से भी इनकार किया है। इस मामले में राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिका पर 27 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
चुनाव आयोग ने तीनों फैसलों को बताया सर्वसम्मति से लिया गया
आयोग के मुताबिक, SIR से जुड़े 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। हलफनामे पर तीनों चुनाव आयुक्तों के हस्ताक्षर भी हैं। यह जवाब उस याचिका के संबंध में दाखिल किया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। आयोग ने कहा कि याचिका एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और याचिकाकर्ता ने उसमें किए गए दावों की संबंधित अधिकारियों से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की। इसी आधार पर आयोग ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना है।
फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों से इनकार
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। आयोग ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान मांगा गया डिक्लेरेशन एक अलग दस्तावेज है। इसे फॉर्म-6 में संशोधन नहीं माना जा सकता। यह विवाद उस मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने उन बदलावों पर आपत्ति जताई थी, जिनके तहत आवेदकों से खुद को या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी और नाना-नानी को पिछली SIR से जोड़ने वाली जानकारी देने को कहा गया था। आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर घोषणा जिस तरह दिखाई गई थी, उससे ऐसा लग सकता था कि फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है।
पुरानी वोटर लिस्ट से नाम नहीं जुड़ने पर BLO करेंगे मदद
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जिन मतदाताओं के नाम पुरानी वोटर लिस्ट से नहीं जुड़ पाए हैं, उनके जरूरी दस्तावेज बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर जाकर जुटाएंगे और ऑनलाइन अपलोड करेंगे। आयोग के मुताबिक, ऐसे मतदाताओं को आम तौर पर सुनवाई के लिए खुद कार्यालय आने की जरूरत नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर सुनवाई की जाएगी और जहां संभव होगा, उसे ऑनलाइन कराया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में किसी का नाम जोड़ने या हटाने का फैसला सक्षम चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश के बिना नहीं किया जाएगा।
ECINet प्लेटफॉर्म की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति
चुनाव आयोग ने बताया कि ECINet प्लेटफॉर्म की जांच के लिए IIT मद्रास और IISc बेंगलुरु के विशेषज्ञों की समिति बनाई गई है। यह समिति प्लेटफॉर्म के कामकाज और नियमों के पालन की जांच करेगी। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। उसके मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है।
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जरूरत पड़ने पर विस्तृत जवाब देगा आयोग
चुनाव आयोग ने कहा कि दशहरे की छुट्टियों के कारण फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर वह याचिका में लगाए गए आरोपों पर विस्तार से जवाब देगा। SIR प्रक्रिया और फॉर्म-6 को लेकर चल रहे इस विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में 27 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।




















