चांदौख हत्या मामला सुलझा: पुरानी रंजिश में की हत्या का 48 घंटे में खुलासा, कुल्हाड़ी जब्त, आरोपी को जेल भेजा
भिण्ड। किसी परिवार के लिए अपने बेटे को खोने का दुख असहनीय होता है। ऐसे में जब हत्या करने वाले का भी पता न हो, तो परिवार की बेचैनी और बढ़ जाती है। ग्राम चांदौख में विश्वनाथ प्रताप सिंह की हत्या के बाद पुलिस के सामने भी यही चुनौती थी कि अज्ञात हमलावर तक कैसे पहुंचा जाए।
मिहोना थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज की और 48 घंटे के भीतर हत्या के मामले का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई से मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के साथ जांच को भी महत्वपूर्ण दिशा मिली है।
22 अक्टूबर की रात हुई थी हत्या
पुलिस के मुताबिक, 22 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात ग्राम चांदौख निवासी विश्वनाथ प्रताप सिंह की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मृतक के पिता संग्राम सिंह ने 23 अक्टूबर को मिहोना थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने अज्ञात व्यक्ति पर अपने बेटे की हत्या करने की शिकायत की।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपराध क्रमांक 117/26 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मामला कायम किया और जांच शुरू की। शुरुआती दौर में आरोपी की पहचान सामने नहीं थी, इसलिए पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया।
विशेष टीम ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भिंड सूरज कुमार वर्मा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप पटेल के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। एसडीओपी लहार प्रवीण त्रिपाठी के मार्गदर्शन तथा मिहोना थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित गुप्ता के नेतृत्व में पुलिस टीम ने विवेचना आगे बढ़ाई। जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने शीतल पुत्र शिवराज राजावत, उम्र 32 वर्ष, निवासी ग्राम चांदौख को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पुरानी रंजिश में सोते समय किया हमला
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने पुरानी रंजिश के चलते वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया। आरोप है कि उसने सोते समय विश्वनाथ प्रताप सिंह पर कुल्हाड़ी से हमला किया था। पुलिस ने आरोपी को गांव के बाहर से गिरफ्तार किया और वारदात में इस्तेमाल कुल्हाड़ी भी जब्त कर ली। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। मामले में पुलिस की आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
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पुलिस टीम की रही सराहनीय भूमिका
अंधे कत्ल का खुलासा करने वाली टीम में थाना प्रभारी रोहित गुप्ता, उपनिरीक्षक ओमकिशोर मिश्रा, सहायक उपनिरीक्षक बलवीर सिंह, प्रधान आरक्षक महेश सिंह (साइबर सेल), प्रधान आरक्षक केशव सिंह, अरविन्द सिंह, इन्द्रबीर सिंह तथा आरक्षक मोहित, रविन्द्र गुर्जर, अरविन्द भदौरिया, सूरज जाट, मनोज शर्मा, विपिन जाट, अहिवरन और अकरम किरार शामिल रहे। महिला आरक्षक वंदना शर्मा, निक्की शर्मा और सुरक्षा कर्मी धर्मेन्द्र ने भी कार्रवाई में भूमिका निभाई। 48 घंटे में आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस की तत्परता को दर्शाती है। हालांकि, किसी परिवार की क्षति की भरपाई संभव नहीं, लेकिन मामले में कार्रवाई से न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।






















