मढ़ई में सांभर के सींग मिलने का मामला: फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा पहुंचीं, ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
सोहागपुर। फील्ड डायरेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को जांच के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वहीं, किरण वाडीवा, उनके पति गोपाल वाडीवा, युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव और क्षेत्रीय आदिवासी नेता सुरेखा शाह सहित ग्रामीणों ने उनसे मुलाकात कर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। ग्रामीणों ने मामले के पीछे सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका जताते हुए शराब दुकान के विरोध में हुए आंदोलन और मुखबिर की भूमिका की भी जांच करने का आग्रह किया। हालांकि, षड्यंत्र की आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और फिलहाल वन विभाग की जांच जारी है।
ग्रामीणों ने जताई षड्यंत्र की आशंका
सोमवार को किरण वाडीवा, उनके पति गोपाल वाडीवा, युवा कांग्रेस की प्रदेश महासचिव एवं क्षेत्रीय आदिवासी नेता सुरेखा शाह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा से मुलाकात की। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई। सुरेखा शाह और ग्रामीणों ने घटनाक्रम के पीछे सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका जताते हुए जांच के सभी पहलुओं को गंभीरता से परखने का आग्रह किया। उनका कहना है कि करीब दो सप्ताह पहले क्षेत्र में शराब दुकान के विरोध में महिलाओं ने 36 घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया था, जिसमें किरण वाडीवा की सक्रिय भूमिका रही थी।
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शराब दुकान के विरोध में हुए आंदोलन की भूमिका पर उठाए सवाल
ग्रामीणों की आशंका है कि शराब दुकान के विरोध में हुए आंदोलन के बाद किरण वाडीवा को किसी साजिश के तहत फंसाने का प्रयास किया गया हो सकता है। उन्होंने शराब कारोबार से जुड़े कुछ तत्वों अथवा असामाजिक लोगों की संभावित भूमिका की भी जांच करने की मांग की। इसके साथ ही ग्रामीणों ने मामले में मुखबिर की भूमिका और सूचना के स्रोत की गहराई से पड़ताल करने पर जोर दिया। हालांकि, इन आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अभी तक किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है।
लाल कपड़े में सींग के साथ नींबू-लौंग मिलने पर भी सवाल
किरण वाडीवा ने बताया कि उनके घर से लाल कपड़े में सांभर के सींग के टुकड़ों के साथ नींबू और लौंग जैसी वस्तुएं भी मिली थीं। उन्होंने इन वस्तुओं की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं और ग्रामीणों ने भी इन परिस्थितियों की बारीकी से जांच करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बरामद सामग्री की वास्तविक स्थिति और उसके घर तक पहुंचने के कारणों का पता लगाया जाना जरूरी है। उनका तर्क है कि मढ़ई के कोर जोन में लंबे समय से गाइड का काम करने वाले लोग वन्यजीव संरक्षण के नियमों और प्रतिबंधित वन्यजीव सामग्री की गंभीरता से परिचित हैं, इसलिए यह पता लगाना आवश्यक है कि सांभर के सींग वहां किन परिस्थितियों में पहुंचे।
डॉग स्क्वॉड ने घर और आसपास के इलाकों में की जांच
मामले की जांच के सिलसिले में सोमवार सुबह डॉग स्क्वॉड की सहायता भी ली गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, खोजी श्वान ने किरण वाडीवा के घर और आसपास के क्षेत्र में जांच की तथा इस दौरान वह आसपास के दो-तीन मोहल्लों के कुछ अन्य घरों तक भी पहुंचा। हालांकि, डॉग स्क्वॉड की कार्रवाई के आधार पर अब तक किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियां बरामद सामग्री, घटनाक्रम की परिस्थितियों और अन्य संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
फील्ड डायरेक्टर बोलीं-तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी जांच
पीपुल्स अपडेट द्वारा जानकारी लिए जाने पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि मामले की गहराई से निष्पक्ष जांच की जाएगी और सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों को भी आश्वस्त किया कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी तथा फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उल्लेखनीय है कि किरण वाडीवा पिछले करीब पांच वर्षों से मढ़ई में गाइड के रूप में कार्यरत हैं, जबकि उनके पति गोपाल वाडीवा लगभग 15 वर्षों से पर्यटन क्षेत्र में गाइड का काम कर रहे हैं। सांभर के सींग बरामद होने के मामले में कार्रवाई के बाद प्रबंधन ने दोनों के गाइड पंजीयन निरस्त कर दिए हैं, जिससे परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने की बात भी सामने आई है।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सांभर के सींग किरण वाडीवा के घर तक कैसे पहुंचे, बरामद सामग्री किन परिस्थितियों में वहां मौजूद थी और क्या इसके पीछे किसी षड्यंत्र की भूमिका है या घटनाक्रम की वास्तविकता कुछ और है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाए, ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो। फिलहाल वन विभाग की जांच जारी है और किसी व्यक्ति या समूह की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।






















