Atal Express Way :किसानों के विरोध के चलते आठ साल से अटकी DPR फिर से बनेगी

किसानों के विरोध के चलते पिछले आठ साल से अटकी अटल प्रोग्रेस-वे की डीपीआर नए सिरे से तैयार की जाएगी। इस प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे को ग्वालियर-भिंड-इटावा और आगरा  नेशनल हाईवे 552 में शिवपुरी के पास मिला दिया जाएगा।
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किसानों के विरोध के चलते आठ साल से अटकी DPR फिर से बनेगी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम, भोपाल। नेशनल हाईवे 552 प्रोजेक्ट करीब 17 हजार करोड़ रुपए की बताया जा रही है। इससे किसानों की जमीनें कम अधिग्रहण करने पर फोकस रहेगा। प्रारंभ में इसकी लागत 12 हजार करोड़ आंकी गई थी। हालांकि NHAI इस एक्सप्रेस-वे का एलाइनमेंट नए सिरे से तैयार करेगा। वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रोजेक्ट को रोक दिया था। इस परियोजना की रूपरेखा चंबल के बीहड़ों को औद्योगिक हब और इंडस्ट्रियल टाउन बनाने के उद्देश्य से मप्र रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के द्वारा तैयार की गई थी। 

    DPR बनाने में डेढ़ करोड़ रुपए खर्च

    अटल एक्सप्रेस-वे की DPR निर्माण में डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हुए थे। पहले इसकी डीपीआर MPRDC ने टू लेन के लिए तैयार कराई थी। इसके बाद यह प्रोजेक्ट NHAI को ट्रांसफर हो गया। NHAI ने इस रोड की डीपीआर 6 लेन के लिए कराई। जिसका ज्यादातर हिस्सा किसानों के जमीन से होकर गुजर रहा था।

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    दो गुना जमीन देने पर भी राजी नहीं हुए किसान

    सरकार ने पहले किसानों को जमीन के बदले जमीन देने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन किसानों के विरोध के बाद सरकार ने इस प्रस्ताव को बदल कर जमीन के बदले किसानों को दोगुना मुआवजा देने के लिए किसानों से बात की। इस प्रस्ताव पर भी किसान तैयार नहीं हुए। किसानों का कहना था कि उन्हें बाजार दर पर मुआवजा चाहिए।

    कई बार बदली डीपीआर

    अटल प्रोग्रेस-वे की डीपीआर कई बार बदली जा चुकी है। अभी भी इसकी डीपीआर फाइनल नहीं हो पाई है। पहले इसे चंबल नदी के किनारे से होकर निकालना था, वाइल्ड लाइफ का इश्यू आ गया। इसके बाद इसे बीहड़ से होकर निकालने की डीपीआर तैयार की गई। लेकिन पर्यावरण की आपत्ति लग गई। इसके बाद चंबल नदी के दो किमी दूर से निकालने का प्रस्ताव तैयार किया गया तो किसान जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए।

    135 गांव हो रहे थे प्रभावित

    अटल प्रोग्रेस-वे बनाने के लिए 63 गांव की निजी भूमि अधिग्रहण किए जाने की समस्या है। इसके अलावा 72 गांव की सरकारी जमीन का उपयोग किया जाएगा। इसमें 13 गांव की 408 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में कुल 1,800 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।

    इन गांवों से ली जाएगी निजी जमीन

    • सबलगढ़ के 18 गांव की 108.555 हेक्टेयर निजी जमीन
    • जौरा के 14 गांव की 77.04 हेक्टेयर
    • मुरैना के 11 गांव की 67.911 हेक्टेयर
    • अंबाह के 07 गांव की 62.668 हेक्टेयर
    • पोरसा के 13 गांव की 137.7137 हेक्टेयर  

    किसानों को जानकारी नहीं

    हाइवे किसानों के खेत से होकर गुजर रहा था। इसका विरोध किया था। अब किस तरफ से होकर यह हाईवे जा रहा है। इसकी जानकारी अभी तक किसानों को नहीं है।  

    महिपाल सिंह गुर्जर, किसान, शिवपुरी

    किसानों की जमीन कम से कम आए इसका ध्यान रखेंगे 

    अटल प्रोग्रेस-वे का एक बार फिर से एलाइनमेंट तैयार होगा। इसमें किसानों की जमीन कम से कम फंसे, इसका ध्यान रखा जा रहा है। 

    एसके सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी NHAI भोपाल।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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