Naresh Bhagoria
18 Jan 2026
Naresh Bhagoria
18 Jan 2026
Naresh Bhagoria
18 Jan 2026
Manisha Dhanwani
18 Jan 2026
अशोक गौतम, भोपाल। नेशनल हाईवे 552 प्रोजेक्ट करीब 17 हजार करोड़ रुपए की बताया जा रही है। इससे किसानों की जमीनें कम अधिग्रहण करने पर फोकस रहेगा। प्रारंभ में इसकी लागत 12 हजार करोड़ आंकी गई थी। हालांकि NHAI इस एक्सप्रेस-वे का एलाइनमेंट नए सिरे से तैयार करेगा। वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस प्रोजेक्ट को रोक दिया था। इस परियोजना की रूपरेखा चंबल के बीहड़ों को औद्योगिक हब और इंडस्ट्रियल टाउन बनाने के उद्देश्य से मप्र रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के द्वारा तैयार की गई थी।
अटल एक्सप्रेस-वे की DPR निर्माण में डेढ़ करोड़ रुपए खर्च हुए थे। पहले इसकी डीपीआर MPRDC ने टू लेन के लिए तैयार कराई थी। इसके बाद यह प्रोजेक्ट NHAI को ट्रांसफर हो गया। NHAI ने इस रोड की डीपीआर 6 लेन के लिए कराई। जिसका ज्यादातर हिस्सा किसानों के जमीन से होकर गुजर रहा था।
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सरकार ने पहले किसानों को जमीन के बदले जमीन देने का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन किसानों के विरोध के बाद सरकार ने इस प्रस्ताव को बदल कर जमीन के बदले किसानों को दोगुना मुआवजा देने के लिए किसानों से बात की। इस प्रस्ताव पर भी किसान तैयार नहीं हुए। किसानों का कहना था कि उन्हें बाजार दर पर मुआवजा चाहिए।
अटल प्रोग्रेस-वे की डीपीआर कई बार बदली जा चुकी है। अभी भी इसकी डीपीआर फाइनल नहीं हो पाई है। पहले इसे चंबल नदी के किनारे से होकर निकालना था, वाइल्ड लाइफ का इश्यू आ गया। इसके बाद इसे बीहड़ से होकर निकालने की डीपीआर तैयार की गई। लेकिन पर्यावरण की आपत्ति लग गई। इसके बाद चंबल नदी के दो किमी दूर से निकालने का प्रस्ताव तैयार किया गया तो किसान जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए।
अटल प्रोग्रेस-वे बनाने के लिए 63 गांव की निजी भूमि अधिग्रहण किए जाने की समस्या है। इसके अलावा 72 गांव की सरकारी जमीन का उपयोग किया जाएगा। इसमें 13 गांव की 408 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में कुल 1,800 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।
हाइवे किसानों के खेत से होकर गुजर रहा था। इसका विरोध किया था। अब किस तरफ से होकर यह हाईवे जा रहा है। इसकी जानकारी अभी तक किसानों को नहीं है।
महिपाल सिंह गुर्जर, किसान, शिवपुरी
अटल प्रोग्रेस-वे का एक बार फिर से एलाइनमेंट तैयार होगा। इसमें किसानों की जमीन कम से कम फंसे, इसका ध्यान रखा जा रहा है।
एसके सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी NHAI भोपाल।