अच्छी सेहत के लिए गहरी नींद को सबसे जरूरी माना जाता है। डॉक्टर और विज्ञान दोनों कहते हैं कि बिना नींद इंसान का शरीर और दिमाग ठीक से काम नहीं कर सकता। लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रहने वाले एक शख्स ने इस सोच को चुनौती दे दी है।
हम बात कर रहे हैं मोहन लाल द्विवेदी की, जो पेशे से रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर हैं। उनका दावा है कि वे पिछले 50 सालों से एक पल के लिए भी नहीं सोए, इसके बावजूद आज 75 साल की उम्र में वे पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय हैं।
मोहन लाल द्विवेदी मध्य प्रदेश प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने अपने करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। आज भी वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट हैं। उनकी कहानी इसलिए चर्चा में है क्योंकि वे कहते हैं कि उन्हें नींद आती ही नहीं, फिर भी उन्हें न कमजोरी होती है और न ही थकान महसूस होती है।
मोहन लाल द्विवेदी बताते हैं कि 1973 में जब उनकी नौकरी एक लेक्चरर के रूप में लगी, तभी से उनकी नींद धीरे-धीरे कम होने लगी। जुलाई 1973 के बाद तो उन्हें पूरी तरह नींद आनी बंद हो गई। इसी दौरान उन्होंने MPPSC (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) की तैयारी शुरू की और 1974 में परीक्षा पास कर नायब तहसीलदार बने।
मोहन लाल कहते हैं कि वे रात को बिस्तर पर लेटते जरूर हैं। पलकें बंद होती हैं, शरीर आराम करता है, लेकिन दिमाग पूरी तरह जागता रहता है। न उन्हें झपकी आती है, न गहरी नींद।
उनका कहना है कि उन्होंने आखिरी बार 1975 के इमरजेंसी के दौरान ठीक से नींद ली थी। उसके बाद जैसे नींद हमेशा के लिए चली गई।
आमतौर पर नींद की कमी से लोगों को थकान, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव, शारीरिक बीमारियां होने लगती हैं। लेकिन मोहन लाल के साथ ठीक उल्टा है। वे बताते हैं कि घंटों काम करने के बाद भी थकान नहीं होती, कई किलोमीटर पैदल चल लेते हैं, लंबे समय तक बैठकर काम कर सकते हैं।
आज भी उनकी दिनचर्या अलग है। रात के सन्नाटे में जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब मोहन लाल किताबें पढ़ते है, टहलते हैं, खुद के साथ समय बिताते हैं। वे कहते हैं कि अब यही उनकी जीवनशैली बन चुकी है।
अपनी इस अनोखी स्थिति को ठीक कराने के लिए मोहन लाल द्विवेदी ने दिल्ली- मुंबई के बड़े-बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाए। उन्होंने योग, आयुर्वेद और झाड़-फूंक तक का सहारा लिया, लेकिन विज्ञान के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
डॉक्टर मानते हैं कि यह मामला नींद न आने की बीमारी (Insomnia) से जुड़ा हो सकता है, लेकिन बिना स्लीप साइकिल के इतने साल तक शरीर का सामान्य रहना आज भी एक रहस्य है।
मोहन लाल द्विवेदी कहते हैं शुरुआत में यह अजीब लगता था, लेकिन अब यह मेरी जिंदगी का हिस्सा है। शरीर स्वस्थ है, यही मेरे लिए सबसे बड़ी बात है। यह सब ईश्वर की कृपा है।