प्रभा उपाध्याय, इंदौर। आसमान में उड़ती पतंगों के पीछे छिपा चाइनीज मांझा केवल इंसानों ही नहीं, बेजुबान पक्षियों के लिए मौत का फंदा बनता जा रहा है। ऐसे घायल पक्षियों की सेवा के लिए इंदौर का नवकार परिवार बीते 7 साल से काम कर रहा है। अब तक यह परिवार करीब 500 पक्षियों की जान बचा चुका है। हर साल मकर संक्रांति पर 14 से 16 जनवरी तक अंतिम चौराहे पर बाकायदा मेडिकल कैंप लगाकर घायल पक्षियों का इलाज किया जाता है।
नवकार परिवार के हिमांशु जैन बताते हैं, जैन मुनि ऋषभ चंद्र सागर महाराज एवं आनंद चंद्र सागर महाराज ने अपने सत्संग में पक्षियों को बचाने की बात कही थी। इसके बाद 2018 में हमने अपना ग्रुप बनाकर घायल पक्षियों को बचाने का कार्य शुरू किया। इसके लिए हमने अपने नंबर कई ग्रुपों पर शेयर किए। साथ ही पंप्लेट्स छपवाकर शहर में जगह-जगह चस्पा करवाए।
हिमांशु ने बताया कि वेटरनरी डॉक्टर डॉ. अभय पटेल से संपर्क किया, तो वह नि:शुल्क सेवा के लिए तैयार हो गए। कहीं किसी पक्षी के घायल होने की सूचना मिलती है, तो उसे बचाने हमारी टीम पहुंच जाती है। वह बताते हैं, इस बार शिविर में विलुप्त प्रजाति के पक्षी धनेश का भी इलाज किया गया।
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नवकार परिवार के सचिन कटारिया बताते हैं, ज्यादा जख्मी पक्षियों की हुंकारगिर क्षेत्र में नवकार वाटिका में देखभाल की जाती है। स्वस्थ होने के बाद उन्हें दोबारा छोड़ दिया जाता है। जो पक्षी उड़ने में असमर्थ होते हैं, उन्हें चिड़ियाघर को सौंप दिया जाता है।
हिमांशु जैन, रूपेंद्र जैन, सुनील श्रीमाल, गौरव श्रीमाल, सचिन जैन सहित करीब 35 लोग इस कार्य में अपनी सेवा दे रहे हैं। इनमें अधिकतर व्यवसायी हैं।
नवकार परिवार से जुड़कर पिछले सात साल से कार्य कर रहा हूं। मुझे अच्छा लगता कि किसी जीव की जान बचे। इस कार्य के लिए मैं कोई फीस नहीं लेता हूं।
डॉ. अभय पटेल, वेटरनरी