वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि, अमेरिका ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को 10 दिनों के लिए रोक रहा है।
ट्रंप ने कहा कि, यह फैसला ईरान सरकार के अनुरोध पर लिया गया है, ताकि दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। कई हफ्तों से लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच यह पहला बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसने कूटनीतिक समाधान की उम्मीद को फिर जिंदा कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए दी। उन्होंने लिखा कि, ईरान के अनुरोध के अनुसार अमेरिका ऊर्जा प्लांट्स पर हमले 10 दिनों के लिए रोक रहा है। ट्रंप के मुताबिक यह रोक सोमवार 6 अप्रैल 2026 को रात 8 बजे (अमेरिकी समय) तक लागू रहेगी।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और यह बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स बातचीत को लेकर गलत जानकारी फैला रही हैं, जबकि वास्तविकता में वार्ता बहुत अच्छी तरह से चल रही है।
ट्रंप इससे पहले भी हमलों की डेडलाइन बढ़ा चुके हैं। पहले यह रोक 5 दिनों के लिए दी गई थी, जो खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10 दिन कर दिया गया है।

पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के तेल और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रहे थे। इन हमलों का उद्देश्य तेहरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर करना बताया गया था। ईरान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक तेल और ऊर्जा निर्यात पर निर्भर है। इसलिए ऊर्जा ठिकानों पर हमला करना युद्ध की रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया था।
इन हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी थी। उसने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगी देशों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। इससे पूरा मध्य-पूर्व क्षेत्र व्यापक युद्ध के खतरे की ओर बढ़ता नजर आने लगा था।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलसंधि से 10 तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति देकर अमेरिका को एक तरह का ‘गिफ्ट’ दिया है। व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने बताया कि, इन टैंकरों पर पाकिस्तान का झंडा लगा हुआ था।
ट्रंप के मुताबिक, शुरुआत में ईरान ने 8 बड़े तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने का प्रस्ताव दिया था, ताकि बातचीत को लेकर अपनी गंभीरता दिखा सके। बाद में उसने 2 और टैंकरों को गुजरने दिया, जिससे कुल संख्या 10 हो गई। ट्रंप ने इसे विश्वास बहाली का संकेत बताया।
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दरअसल, इससे पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलसंधि पूरी तरह सुरक्षित नहीं की गई, तो अमेरिका ईरान के बड़े ऊर्जा केंद्रों पर हमला करेगा। होर्मुज जलसंधि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस इलाके में किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर तुरंत असर डालती है।
अमेरिका द्वारा ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में भी तुरंत असर दिखा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 0.8% गिरकर 107.11 डॉलर प्रति बैरल हो गई। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 0.88% गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक दिन पहले ही युद्ध की वजह से तेल कीमतों में 5–6% तक उछाल देखने को मिला था।
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युद्ध के दौरान ईरान के भीतर हालात भी काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। लंदन स्थित इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था के अनुसार, ईरान में आम नागरिकों के लिए इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 27-28 दिनों से इंटरनेट शटडाउन जारी है। इंटरनेट कनेक्टिविटी 1% से भी कम रह गई है, केवल उन्हीं लोगों को इंटरनेट एक्सेस मिल रहा है जिन्हें सरकार ने अनुमति दी है।
ईरानी अधिकारियों ने हाल ही में छापेमारी के दौरान 7 स्टारलिंक डिवाइस भी जब्त किए, जिनका इस्तेमाल प्रतिबंधों के बावजूद इंटरनेट एक्सेस करने के लिए किया जा रहा था।
इस दौरान ट्रंप ने ब्रिटेन की सैन्य क्षमता पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि, ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर अमेरिका के मुकाबले खिलौनों जैसे हैं। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि युद्ध की शुरुआत में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका को डिएगो गार्सिया बेस से B-2 बॉम्बर उड़ाने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, ब्रिटेन पहले ही ट्रंप के इस दावे को खारिज कर चुका है कि उसने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को मिडिल ईस्ट भेजने की पेशकश की थी।
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दूसरी ओर ईरान अभी भी अमेरिका के साथ शांति वार्ता को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान ने बातचीत शुरू करने से पहले कुछ शर्तें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-
ईरान का कहना है कि अगर वास्तव में बातचीत करनी है तो पहले बमबारी और हत्याएं बंद करनी होंगी।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच मौजूदा युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी। उस दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। साथ ही युद्ध की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
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ट्रंप ने हाल ही में ईरान को चेतावनी भी दी थी। उनका कहना था कि ईरान को जल्द फैसला लेना होगा। ट्रंप के मुताबिक ईरान को या तो कोई समझौता करना होगा, या फिर उसे लगातार हमलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि सैन्य दृष्टि से अमेरिका इस युद्ध में बढ़त बना चुका है।