ट्रंप की यह चीन यात्रा सिर्फ एक कूटनीतिक दौरा नहीं बल्कि कई बड़े वैश्विक मुद्दों पर बातचीत का मंच बनने वाली है। व्यापार से लेकर ताइवान और ईरान तक, हर मुद्दे पर नजर रहेगी। हालांकि बड़े फैसलों की उम्मीद कम है, लेकिन बातचीत से रिश्तों में कुछ नरमी जरूर आ सकती है।
ट्रंप ने खुद जानकारी दी है कि वे 14 और 15 मई को बीजिंग जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि साल के अंत में शी जिनपिंग को वाशिंगटन आने का न्योता दिया जाएगा। यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि इसके जरिए ट्रंप दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि अमेरिका एक साथ कई बड़े मुद्दों जैसे मध्य पूर्व में चल रहा तनाव और चीन के साथ रिश्ते को संभाल सकता है। हालांकि, चीन के दूतावास ने अभी इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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इस मुलाकात में कृषि और हवाई जहाज के पुर्जों के व्यापार से जुड़े कुछ समझौते हो सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच थोड़ी नरमी आ सकती है। लेकिन असली चुनौती ताइवान जैसे मुद्दों पर है। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में ताइवान को हथियारों की बिक्री बढ़ा दी है, जिससे चीन नाराज है। बीजिंग साफ कह चुका है कि इस मुद्दे को बहुत सावधानी से संभालना चाहिए। ऐसे में उम्मीद कम है कि ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कोई बड़ी सहमति बन पाएगी, लेकिन बातचीत जरूर होगी।
इस समय ईरान से जुड़ा तनाव भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिसने ग्लोबल इकोनॉमी को प्रभावित किया है। ट्रंप ने चीन सहित कई देशों से सहयोग मांगा है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर, लेकिन चीन की ओर से अभी तक कोई साफ जवाब नहीं आया है।