वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में कई हफ्तों से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच अब युद्धविराम की उम्मीदें तेज हो गई हैं। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी इस संघर्ष ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और कूटनीति को हिला दिया है। इसी बीच खबर सामने आई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान को एक 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना में एक महीने के युद्धविराम की बात कही गई है, ताकि दोनों पक्ष स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत कर सकें। यह प्रस्ताव अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय गतिविधियों से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल हैं। इस बीच पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश भी की है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है। इस युद्ध में कई देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं। लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच अमेरिका अब इस संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहा है। इसी रणनीति के तहत ट्रंप प्रशासन ने ईरान को एक विस्तृत शांति प्रस्ताव भेजा है। माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर की टीम ने तैयार किया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस योजना के तहत एक महीने के युद्धविराम के दौरान दोनों पक्ष आपसी बातचीत के जरिए स्थायी समझौते की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक यह शांति प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया है। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करने की भी पेशकश की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। अगर दोनों पक्ष तैयार होते हैं तो अगला दौर पाकिस्तान में होने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह की मध्यस्थता से क्षेत्रीय तनाव कम करने में मदद मिल सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की इस योजना में कई सख्त शर्तें शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर नियंत्रण करना है।
1. परमाणु कार्यक्रम पर कड़ी रोक
प्रस्ताव के मुताबिक ईरान को अपनी मौजूदा परमाणु क्षमताओं को खत्म करना होगा और भविष्य में परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता देनी होगी।
2. यूरेनियम संवर्धन पर प्रतिबंध
ईरानी धरती पर यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना होगा। साथ ही 60 प्रतिशत तक संवर्धित लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सौंपना होगा।
3. परमाणु ठिकानों को खत्म करना
नतांज, इस्फहान और फोर्डो जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों को नष्ट करने की शर्त भी प्रस्ताव में शामिल बताई जा रही है।
4. मिसाइल कार्यक्रम पर सीमा
ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की रेंज और संख्या पर कड़ी सीमाएं लगाने का प्रस्ताव है।
5. प्रॉक्सी युद्ध खत्म करने की मांग
ईरान को क्षेत्रीय संगठनों और मिलिशिया समूहों को हथियार, फंडिंग और सैन्य समर्थन देना बंद करना होगा।
इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी बेहद अहम माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से गुजरता है। हाल ही में ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर इस जलमार्ग पर आंशिक नाकाबंदी लगा दी थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई थी। प्रस्ताव के मुताबिक ईरान को इस जलमार्ग को पूरी तरह खोलना होगा और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी होगी।
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अगर ईरान इस योजना को स्वीकार करता है तो उसे कई बड़े फायदे भी मिल सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटेंगे
ईरान पर लगाए गए कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं।
आर्थिक और तकनीकी मदद
अमेरिका और अन्य देश ईरान को नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने में मदद कर सकते हैं।
बुशहर परमाणु संयंत्र में सहयोग
रिपोर्ट्स के अनुसार बुशहर में बिजली उत्पादन जैसे नागरिक परमाणु कार्यक्रमों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग दिया जा सकता है।
इजरायल के चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना के तहत अमेरिका और ईरान एक महीने के युद्धविराम की घोषणा कर सकते हैं। इस अवधि के दौरान दोनों पक्ष इस शांति योजना पर विस्तृत बातचीत करेंगे। इसका उद्देश्य एक स्थायी समझौते तक पहुंचना है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत की खबरों को लेकर सावधानी बरती है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे सही नहीं हैं। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ईरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ बातचीत करने के लिए ज्यादा तैयार दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को लगता है कि वेंस युद्धविराम के प्रति ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधियों ने संकेत दिया है कि वे अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के साथ बातचीत फिर से शुरू नहीं करना चाहते। बताया जा रहा है कि, सैन्य कार्रवाई शुरू होने से पहले बातचीत टूट जाने के कारण दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी पैदा हो गई है। इसी वजह से ईरान किसी नए वार्ताकार के साथ बातचीत की संभावना तलाश रहा है।
इस प्रस्ताव को लेकर इजरायल के भीतर भी चिंता देखी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल को डर है कि अमेरिका जल्दबाजी में युद्धविराम करा सकता है, जिससे ईरान को फिर से अपनी सैन्य ताकत मजबूत करने का मौका मिल सकता है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत ने कहा है कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच चल रही किसी बातचीत का हिस्सा नहीं है।
मिडिल ईस्ट में जारी इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिली है। अगर यह शांति योजना सफल होती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौट सकती है।
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भारत जैसे देशों के लिए मिडिल ईस्ट की स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है। इसी कारण भारत समेत कई देश इस युद्धविराम प्रस्ताव पर नजर बनाए हुए हैं।
अमेरिका की इस 15-सूत्रीय योजना को मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को खत्म करने की एक बड़ी कूटनीतिक कोशिश माना जा रहा है। हालांकि अभी तक न तो अमेरिका, न ईरान और न ही इजरायल की ओर से इस योजना पर कोई आधिकारिक सहमति सामने आई है। लेकिन अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है और दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार होते हैं, तो मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।