वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी से जारी युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा दावा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कहा कि, ईरान के नेतृत्व ने अनौपचारिक रूप से उन्हें देश का अगला सुप्रीम लीडर बनने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया। रिपब्लिकन पार्टी के एक फंडरेजर कार्यक्रम में बोलते हुए ट्रंप ने यह बात कही। उनके इस बयान ने दुनियाभर में राजनीतिक बहस छेड़ दी है क्योंकि ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने हल्के अंदाज में कहा कि, ईरान के कुछ लोगों ने उनसे कहा कि वे देश के अगले सुप्रीम लीडर बन सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि उनसे कहा गया था कि, हम आपको अपना अगला सुप्रीम लीडर बनाना चाहते हैं।
इस पर उन्होंने जवाब दिया कि, नहीं, शुक्रिया… मुझे यह नौकरी नहीं चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि मौजूदा हालात में दुनिया का कोई भी राष्ट्राध्यक्ष ईरान का प्रमुख बनने की इच्छा नहीं रखेगा।
अपने भाषण में ट्रंप ने यह भी कहा कि, ईरान इस समय बेहद कमजोर स्थिति में है और समझौता करना चाहता है। ट्रंप के अनुसार, ईरान युद्ध से बुरी तरह प्रभावित है, तेहरान की सरकार बातचीत करना चाहती है। लेकिन सार्वजनिक रूप से ऐसा कहने से डर रही है। उन्होंने दावा किया कि, ईरान के नेताओं को डर है कि अगर वे खुलकर समझौते की बात करेंगे तो उनके अपने ही लोग उन्हें मार सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि, अमेरिका इस युद्ध में बड़ी जीत हासिल कर रहा है।
ट्रंप के मुताबिक अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए 15 सूत्रों वाला प्रस्ताव भेजा है।
इस प्रस्ताव में कुछ प्रमुख मांगें शामिल हैं-
ट्रंप का दावा है कि, अगर ईरान इन शर्तों को मान लेता है तो युद्ध जल्द खत्म हो सकता है।
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हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान के एक अधिकारी ने टीवी पर बयान देते हुए कहा कि, क्या ट्रंप खुद से बात कर रहे हैं? हम उनके साथ कोई डील नहीं करेंगे। ईरान का कहना है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की आधिकारिक बातचीत नहीं चल रही है। ईरान ने यह भी कहा कि युद्ध खत्म करने की शर्तें वही तय करेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अमेरिका को अपना 5 सूत्रीय जवाब दिया है। इसमें कहा गया है कि-
ईरान का साफ कहना है कि, अमेरिका की शर्तों पर समझौता संभव नहीं है।
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इस बीच ईरान के अंदर राजनीतिक स्थिति भी काफी अस्थिर बताई जा रही है। पिछले महीने अचानक हुए हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी। उनकी मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया।
हालांकि, युद्ध शुरू होने के बाद से वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, वे हमलों में घायल हो गए हैं। इस वजह से ईरान के नेतृत्व को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
अपने भाषण में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों को सैन्य विनाश बताया। उन्होंने कहा कि, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़ी जीत हासिल की है और ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप ने कहा कि, हम इतनी बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं कि दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी।
ट्रंप ने अपने भाषण में 2015 के ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर यह समझौता जारी रहता तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार होता।
ट्रंप के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान को बहुत रियायतें दीं। इसलिए उन्होंने सत्ता में आते ही इस समझौते को खत्म कर दिया। उनका कहना था कि ईरान को परमाणु हथियार बनने से रोकना बेहद जरूरी था।
ट्रंप ने ईरानी जनरल कासेम सुलेमानी की हत्या का भी जिक्र किया। सुलेमानी की हत्या 3 जनवरी 2020 को बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में हुई थी। ट्रंप ने कहा कि सुलेमानी बेहद खतरनाक व्यक्ति था और उसे मारना जरूरी था।
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ट्रंप का यह दावा कि, ईरान ने उन्हें सुप्रीम लीडर बनने का प्रस्ताव दिया था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है। एक तरफ ट्रंप कह रहे हैं कि, ईरान समझौता करना चाहता है, गुप्त बातचीत चल रही है। वहीं दूसरी तरफ ईरान इन सभी दावों को झूठ बता रहा है। ऐसे में सच क्या है, यह अभी साफ नहीं है।
मिडिल ईस्ट में जारी इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इस युद्ध के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा संकट जैसी स्थिति बन गई है। दुनिया के कई देश इस संघर्ष को खत्म कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।