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बीमारी या संक्रमण?गिर में 4 शेर शावकों की मौत से हड़कंप, 17 शेर आइसोलेशन में

गुजरात के गिर वन क्षेत्र में संदिग्ध संक्रमण से शेरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। चार शेर शावकों की मौत के बाद वन विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए कई शेरों को अलग कर निगरानी शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में बेबेसिया जैसे परजीवी संक्रमण की आशंका जताई जा रही है और पूरे इलाके में स्वास्थ्य जांच अभियान तेज कर दिया गया है।
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गिर में 4 शेर शावकों की मौत से हड़कंप, 17 शेर आइसोलेशन में
फाइल फोटो

गुजरात । गुजरात के विश्व प्रसिद्ध गिर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में शेरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता का माहौल बन गया है। चार शेर शावकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने वन विभाग को अलर्ट पर ला दिया है। शुरुआती जांच में बेबेसिया जैसे परजीवी संक्रमण की आशंका जताई गई है, जो टिक्स के जरिए फैलता है। एहतियात के तौर पर 17 वयस्क शेरों को अलग रखकर उनकी निगरानी की जा रही है। सरकार और वन विभाग ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य जांच और नियंत्रण उपायों को तेज कर दिया है।

गिर में अलर्ट जारी

गुजरात के गिर वन क्षेत्र में चार शेर शावकों की अचानक मौत ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। इन मौतों के पीछे किसी संक्रमण की आशंका जताई जा रही है। यह मामला परजीवी संक्रमण से जुड़ा हो सकता है, जिसमें जानवरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में निगरानी और तेज कर दी गई है ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।

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17 शेरों को अलग रखकर शुरू हुआ इलाज

घटना के तुरंत बाद वन विभाग ने तेजी से कदम उठाते हुए 17 वयस्क शेरों को अन्य झुंडों से अलग कर दिया है। इन सभी शेरों की लगातार स्वास्थ्य जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इन शेरों में अभी तक किसी तरह के गंभीर लक्षण सामने नहीं आए हैं लेकिन एहतियात के तौर पर उन्हें आइसोलेशन में रखा गया है। पूरे क्षेत्र में वनकर्मियों की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। विभाग का उद्देश्य है कि संक्रमण यदि मौजूद हो तो उसे शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।

टिक्स से फैलने वाले संक्रमण पर जताई जा रही आशंका

बेबेसिया जैसे संक्रमण की संभावना सामने आई है, जो आमतौर पर टिक्स यानी छोटे कीड़ों के माध्यम से फैलता है। यह संक्रमण जानवरों के शरीर में कमजोरी, सांस लेने में परेशानी और अन्य लक्षण पैदा कर सकता है। गर्मी के मौसम में ऐसे संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इस समय परजीवी अधिक सक्रिय हो जाते हैं। वन विभाग ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पूरे क्षेत्र में डी-टिकिंग अभियान शुरू कर दिया है ताकि शेरों को ऐसे परजीवियों से बचाया जा सके।

उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने की समीक्षा

घटना के बाद राज्य सरकार भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की। बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान विनोद राव ने बताया कि गिर गढ़डा और बाबरिया क्षेत्र के 10 किलोमीटर दायरे में आने वाले सभी शेरों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

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विशेषज्ञ टीम और लगातार निगरानी

वन विभाग ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को भी शामिल किया है, जिसमें जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ भी काम कर रहे हैं। यह टीम शेरों के स्वास्थ्य की लगातार जांच कर रही है। साथ ही अमरेली और भावनगर क्षेत्रों में भी शेरों पर नजर रखी जा रही है। विभाग की ओर से रोजाना रिपोर्ट तैयार की जा रही है ताकि किसी भी बदलाव को तुरंत ट्रैक किया जा सके।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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