दयाशंकर मिश्र की पुस्तक ‘अखलाक’ पर परिचर्चा: पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह बोले- मॉब लिंचिंग पर चुप्पी तोड़िए, निंदा कीजिए

भोपाल। राजधानी के गांधी भवन में वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्र को उनकी पुस्तक ‘अखलाक’ भारत में मॉब लिंचिंग की विस्तृत जमीनी पड़ताल के लिए बहुजन इंटलेक्ट सम्मान से अलंकृत किया गया। प्रदेश की सामाजिक संस्था बहुजन इंटलेक्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पुस्तक पर परिचर्चा भी हुई। इसमें विभिन्न वक्ताओं ने पुस्तक और मॉब लिंचिंग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे।
दिग्विजय सिंह बोले-संविधान और बहुसंख्यक समुदाय हिंसा के खिलाफ खड़ा है
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह किताब देश के अल्पसंख्यक समाज को यह हौसला देती है कि भारत का संविधान और बहुसंख्यक समुदाय इस तरह की हिंसा के खिलाफ है और उनके साथ खड़ा है। इस पुस्तक में गुजरात, महाराष्ट्र, उड़ीसा, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पिछले कुछ वर्ष में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं और उनके बाद के हालात की जमीनी पड़ताल की गई है। किताब अमेरिका में मॉब लिंचिंग के इतिहास से शुरू होकर भारत के वर्तमान की तुलना करती है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह ने अपने लिखित संदेश में कहा कि अहिंसा और अवैर सनातन धर्म का मूल लक्षण है। जो लोग धर्म के आधार पर हिंसा करते हैं, वे हिंदू धर्म का अपमान करते हैं।

'लेखक पत्रकार दयाशंकर मिश्र ने विषम परिस्थितयों में किताब लिखी'
इस अवसर पर किताब पर हुई परिचर्चा में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि दयाशंकर मिश्र हमारे समय के निर्भीक लेखक और पत्रकार हैं। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में पीड़ित परिवारों, आरोपियों और नीति नियंताओं से विषम परिस्थितियों में बातचीत कर यह दस्तावेजी महत्व की किताब प्रकाशित की है।
किताब लिखना बड़ी पीड़ा से गुजरने जैसा था : दयाशंकर मिश्र
दयाशंकर मिश्र ने कहा कि इस किताब को लिखना उनके लिए एक बड़ी पीड़ा से गुजरना था। जिन परिवारों के सदस्यों को बिना किसी गुनाह के कत्ल कर दिए गए, उनसे उनके दर्द के बारे में बातचीत करना उनके जख्मों को कुरेदने जैसा था। लेकिन यह कठिन काम करना हमारे समय की जरूरत थी। हमें यह समझने की जरूरत है कि मॉब लिंचिंग सिर्फ अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, इनके पीछे राजनैतिक स्वार्थ हैं जो मॉब लिंचिंग के ईंधन का काम करते हैं।
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हिंदू-मुसलमान के भेद को मिटाने की जरूरत : सौरभ वाजपेयी
कांग्रेस केंद्रीय वार रूम ट्रेनिंग प्रभारी प्रोफेसर सौरभ वाजपेयी ने कहा कि दयाशंकर मिश्र की किताब हमारे समाज को आईना दिखाने का काम करती है। जरूरत इस बात की है कि हम हिंदू-मुसलमान के भेद को मिटाकर संवैधानिक और सच्चे धार्मिक मूल्यों के आधार पर अपने राष्ट्र का नवनिर्माण करें।
मॉब लिंचिंग की घटनाएं लोकतंत्र को शर्मसार करती हैं : शैलबाला मार्टिन
पूर्व आईएसएस अधिकारी शैलबाला मार्टिन ने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को शर्मसार करती हैं। इसके शिकार मुख्य रूप से मुस्लिम, ईसाई, दलित और आदिवासी बन रहे हैं। इस प्रवृत्ति के खिलाफ देश को एकजुट होने की जरूरत है।
महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने की जरूरत : संजय सिंह
इस अवसर पर गांधी भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि हम सबको महात्मा गांधी के रास्ते पर चलने की जरूरत है। इस रास्ते में सांप्रदायिक घृणा और हिंसा के लिए जगह नहीं है। सामाजिक सद्भाव के लिए यह किताब महत्वपूर्ण है। सभा को साहित्यकार ओम प्रकाश बबेले, डॉ. मेजर मनोज राजे, पत्रकार कासिफ काकवी, सामाजिक कार्यकर्ता इनायत अब्बास ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता सुनील बोरसे ने किया। कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश की सामाजिक संस्था बहुजन इंटलेक्ट ने किया।
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भीड़ ने गोमांस के शक में किया था हमला
मोहम्मद अखलाक की मॉब लिंचिंग 28 सितंबर 2015 को उत्तर प्रदेश के दादरी के बिसाहड़ा गांव में हुई थी। मंदिर से कथित तौर पर यह घोषणा होने के बाद कि अखलाक के घर में गोमांस रखा गया है, भीड़ ने उनके घर पर हमला किया। 50 वर्षीय मोहम्मद अखलाक और उनके बेटे दानिश को घर से बाहर खींचकर पीटा गया। गंभीर रूप से घायल अखलाक की अस्पताल में मौत हो गई, जबकि दानिश गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के बाद हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज हुआ और कई लोगों को आरोपी बनाया गया।



















