Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

इंदौर:'डिजिटल दरबार' बना किसानों का सहारा, सोशल मीडिया से मिल रही सटीक मौसम जानकारी

बदलते समय के साथ खेती का तरीका भी बदल रहा है। अब किसान सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए मिलने वाली मौसम जानकारी पर भी भरोसा करने लगे हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई किसान 'डिजिटल दरबार' के जरिए खेती से जुड़े अहम फैसले ले रहे हैं।
Follow on Google News
'डिजिटल दरबार' बना किसानों का सहारा, सोशल मीडिया से मिल रही सटीक मौसम जानकारी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रभा उपाध्याय, इंदौर

    डिजिटल दौर में यह पहल किसानों के लिए एक मजबूत सहारा बन रही है। सैटेलाइट डेटा और भारतीय मौसम विभाग की एडवाइजरी के साथ-साथ ऐप्स का उपयोग कर दी जा रही जानकारी खेती को सुरक्षित और ज्यादा फायदे का सौदा बना रही है। आने वाले समय में ऐसे डिजिटल प्रयास खेती की दिशा बदल सकते हैं

    सोशल मीडिया बना खेती का नया साथी

    मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक किसान अब फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब,जैसे प्लेटफॉर्म पर एक्टिव हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन्हें रोजाना मौसम की अपडेट मिल रही है, जो उनके लिए काफी मददगार साबित हो रही है। किसान अब इन्हीं जानकारियों के आधार पर बुवाई, सिंचाई और कटाई जैसे फैसले ले रहे हैं, जिससे जोखिम कम हो रहा है।

    ये भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट तनाव: अबू धाबी में मिसाइल इंटरसेप्ट के बाद गिरा मलबा, 5 भारतीय घायल

    इंदौर के किसान की अनोखी पहल

    इंदौर के हातौद के किसान सुमेर सिंह सिसौदिया पिछले चार सालों से मौसम की जानकारी जुटाकर लोगों तक पहुंचा रहे हैं। पिछले 9 महीनों से उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इसे और आसान बना दिया है, जिससे हजारों किसानों को फायदा मिल रहा है। वे रोजाना संभावित बारिश, ओलावृष्टि और तापमान में बदलाव की जानकारी सरल भाषा में शेयर करते हैं, जिससे किसान समय रहते सतर्क हो जाते हैं।

    ये भी पढ़ें: असम में चुनावी महाभारत: भाजपा और AIMIM में तीखी बयानबाजी, ओवैसी ने सरकार पर साधा निशाना

    लाखों किसान जुड़े, बढ़ा भरोसा

    सिसौदिया के प्लेटफॉर्म्स पर तीन लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि यहां मिलने वाली जानकारी स्थानीय स्तर पर ज्यादा सटीक होती है, जिससे फसल नुकसान से बचती है। देपालपुर के किसान महेश पटेल ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर फॉलो करने के बाद दो बार अपनी फसल खराब होने से बचाई है।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

    Latest Posts