भोपाल। मप्र विधानसभा द्वारा दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द करते ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। अब इस मामले में सबकी निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर लगी हैं। गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत से भारती को 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा सचिवालय रात करीब 11 बजे खोला गया और भारती की सदस्यता खत्म करने का आदेश जारी किया गया। इसके बाद भारती की सीट रिक्त घोषित करने का पत्र चुनाव आयोग को भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इधर, इसको लेकर उठ रहे सवालों के बीच विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को ग्वालियर में पत्रकारवार्ता ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधिसम्मत कार्रवाई हुई है। आगे भी कोर्ट जैसा निर्णय देगा, हम वैसा पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी इस तरह के उदाहरण हम लोगों के सामने हैं। विधायक आशा देवी के मामले में भी इसी प्रकार का निर्णय आया था और सजा के आधार पर उनकी सदस्यता गई थी। वर्ष 2019 में प्रहलाद लोधी विधायक थे। उनके मामले में भी ऐसा ही निर्णय आया था और उनको भी आयोग्य घोषित किया गया था।
मेरे साथ पक्षपात और कानून के साथ खिलवाड़ किया गया। रात के अंधेरे में सदस्यता शून्य करने के निर्णय में दुर्भावना स्पष्ट है। हम बड़ी अदालत में जाएंगे। अदालत पर हमें पूरा भरोसा है।
राजेंद्र भारती
राजेंद्र भारती के मामले में विधानसभा सचिवालय ने जल्दबाजी की है। इस मामले में इंतजार किया जाना चाहिए था, क्योंकि जब अदालत अवसर दे रही है तो विधानसभा को भी मौका देना चाहिए।
भगवान देव इसरानी, पूर्व प्रमुख सचिव, विधानसभा
भारती को एमपी-एमएलए कोर्ट से दोष सिद्ध होने पर सजा दी गई है। सदस्यता शून्य करने संबंधी आदेश कोर्ट की गाइडलाइन के आधार पर हुआ है। रात में दिल्ली से लौटा था और विधानसभा पहुंचकर 5 मार्च को हो रहे एक कार्यक्रम को लेकर तैयारी की समीक्षा की। इसी दौरान सदस्यता शून्य होने संबंधी आदेश जारी किए।
अरविंद शर्मा, प्रमुख सचिव, विधानसभा
जब मामला न्यायालय में है और अपील के लिए समय दिया गया है, तो फिर सदस्यता समाप्त करने की इतनी जल्दबाजी क्यों? यह साफ है कि राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा हर संभव प्रयास कर रही है कि विपक्ष के विधायकों को किसी भी तरह प्रक्रिया से बाहर किया जाए।
उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष
राजेंद्र भारती को अपील पेश करने के लिए 60 दिन का समय इसलिए दिया गया, क्योंकि उनका मामला दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल होगा। यदि अपील निचली अदालत में दाखिल होना होता, तो उसकी मियाद 30 दिनों की होती। भारती की अपील पर यदि हाईकोर्ट सजा को स्टे करता है तो उनकी विधायकी बरकरार रहेगी। वहीं सजा के क्रियान्वयन (एक्जीक्यूशन) पर स्टे होता है, तो उस स्थिति में वो विधायक नहीं रह सकेंगे। जहां तक रात में सदस्यता समाप्त करने की बात है तो विशेष मामलों में सदन रात में भी लग सकता है। विशेष मामले अपवाद होते हैं। वैसे तो सुप्रीम कोर्ट का टाइम फिक्स होता है, लेकिन वहां भी विशेष मामलों की आधी रात को सुनवाई होती है।
अधिवक्ता ज्ञानेन्द्र सिंह बघेल, चुनावी मामलों के जानकार