पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के एकाएक इस्तीफे के बाद, HDFC बैंक फिर से सुर्खियों में है। बैंक ने क्रेडिट इश्यू के एडिश्नल टियर-1 (AT1) बॉन्ड की गलत बिक्री के आरोप में 12 वरिष्ठ और मिड-लेवल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
कार्रवाई करते हुए 12 अधिकारियों के सैलरी इंक्रीमेंट रोक दिए गए। उनके एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) रद्द कर दिए गए। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई उनमें आशीष पार्थसारथी शामिल हैं जो ब्रांच बैंकिंग, पेमेंट्स, ट्रेजरी, लायबिलिटी प्रोडक्ट्स और मार्केटिंग के ग्रुप हेड हैं।
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साल 2023 में बैंक के कुछ अफसरों ने दुबई और बहरीन स्थित शाखाओं के जरिए NRIs (विदेश में रहने वाले भारतीयों) को क्रेडिट इश्यू के AT1 बॉन्ड बेचे। उन्होंने ग्राहकों को भरोसा दिलाया कि यह सुरक्षित निवेश हैं और FD की तरह पैसा तय समय पर लौट जाएगा। असल में, AT1 बॉन्ड्स जोखिम भरे होते हैं। अगर बैंक डूबता है या कुछ अप्रत्याशित होता है, तो इन बॉन्ड्स का मूल्य शून्य हो सकता है। मार्च 2023 में क्रेडिट इश्यू का UBS द्वारा आपातकालीन अधिग्रहण हुआ जिसके तहत इन बॉन्ड्स का मूल्य घटाकर शून्य कर दिया गया। इस वजह से निवेशकों के लाखों-करोड़ों रुपये डूब गए।
CEO शशिधरन जगदीशन ने कहा कि यह कोई फ्रॉड नहीं है, बल्कि नियमों को समझने में तकनीकी गलती हुई। बैंक ने यह कार्रवाई संदेश देने के लिए की है कि ग्राहकों को गलत जानकारी देकर निवेश बेचना स्वीकार्य नहीं होगा। इसके अलावा दुबई ब्रांच में नए ग्राहकों को जोड़ने पर रोक लगा दी गई। साथ ही अधिकारियों के स्टॉक ऑप्शन और सैलरी हाइक रद्द किए गए। यह कार्रवाई AT1 बॉन्ड विवाद के सिलसिले में बैंक द्वारा की गई जवाबदेही संबंधी कदमों की एक कड़ी है, जो ग्राहकों के हित और बैंक की विश्वसनीयता बनाए रखने पर केंद्रित है।