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'थप्पड़ खाए, गालियां सुनीं, कई रातें नहीं सोई'…धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भावुक हुई अभिजीत दिपके की मां

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे की खबर सुनते ही छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके के घर पर जश्न और भावुकता का माहौल है। इस्तीफे के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत की मां ने नम आंखों से कहा, 'आज न केवल मेरे बेटे के संघर्ष की, बल्कि देश के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के संयम की जीत हुई है।'
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भावुक हुई अभिजीत दिपके की मां
अभिजीत दिपके और उनकी मां अनीता दिपके

नेशनल  डेस्क। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके के घर पर खुशी और भावुकता का माहौल देखने को मिला। अभिजीत की मां अनीता दिपके ने कहा कि यह केवल उनके बेटे की नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और उनके अभिभावकों के धैर्य और संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान बेटे के साथ हुई घटनाओं ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से झकझोर दिया था।

'बेटे को थप्पड़ मारे गए, कई रातों तक नहीं आई नींद' 

अनीता दिपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान अभिजीत के साथ मारपीट की गई, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा। उन्होंने कहा, "जब मुझे पता चला कि उसे थप्पड़ मारे गए हैं तो मैं कई रातों तक सो नहीं सकी। सुबह तीन-चार बजे तक जागती रहती थी। न खाने की इच्छा होती थी और न ही किसी काम में मन लगता था। 7 जून के बाद से पूरा परिवार तनाव में था।" उन्होंने कहा कि कम उम्र में बेटे ने जिस साहस और दृढ़ता के साथ अपनी बात रखी, उस पर उन्हें गर्व है।

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पिता बोले- छात्रों की मांग सुनी गई, यह स्वागतयोग्य फैसला 

अभिजीत के पिता ने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना और यह फैसला विद्यार्थियों के हित में है। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान का भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस्तीफा देते समय उन्होंने छात्रों से आंदोलन में उलझने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देने और देश के विकास में योगदान देने की अपील की, जो उनके बड़े दिल का परिचायक है। उन्होंने बताया कि इस्तीफे की जानकारी उन्हें एक मित्र से मिली, जिसके बाद उन्होंने टीवी पर पूरी खबर देखी।

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'गालियां, बदनामी और आरोप झेले, लेकिन हिम्मत नहीं हारी' 

अभिजीत के पिता ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान उनके बेटे ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया। उन्हें गालियां दी गईं, थप्पड़ मारे गए, उन पर स्याही फेंकी गई और यहां तक कि उन्हें आतंकवादी तक कहा गया। इन घटनाओं से पूरा परिवार गहरे तनाव में रहा, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा कि अमेरिका से लौटने के बाद से अभिजीत लगातार आंदोलन में जुटा रहा और पिछले डेढ़ महीने परिवार के लिए बेहद कठिन रहे। अब उन्हें संतोष है कि लंबे संघर्ष के बाद यह परिणाम सामने आया है। 

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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