इंदौर। शहर के बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित जल से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस त्रासदी में अब तक 36 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि एक हजार से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं। इस बीच 74 वर्षीय बुजुर्ग महिला मंजूला वाढ़े की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट में उनकी मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन पेट में संदिग्ध पीले द्रव की मौजूदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉक्टरों की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार मंजूला वाढ़े के पेट में लगभग 100 मिलीलीटर पीले रंग का द्रव पाया गया है। हालांकि यह द्रव किस कारण से बना और इसका मौत से क्या संबंध है, यह अभी साफ नहीं हो सका है। इसके चलते डॉक्टरों ने मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए हिस्टोपैथोलॉजिकल एग्जामिनेशन कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए शरीर के महत्वपूर्ण अंगों — फेफड़े, लिवर, स्प्लीन, किडनी, ब्रेन और हार्ट के टिशू सैंपल लेकर जांच के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।
इसके अलावा विसरा भी केमिकल एनालिसिस के लिए सुरक्षित किया गया है, जबकि आंत का सैंपल कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट के लिए भेजा गया है। यह जांच इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में की जाएगी। डॉक्टरों का कहना है कि इन सभी जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर बुजुर्ग महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
दरअसल, 29 दिसंबर की रात मंजूला वाढ़े ने घर का पानी पीने के कुछ समय बाद अचानक उल्टी और दस्त की शिकायत की थी। उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। पूरी रात उनके बुजुर्ग पति दिगंबर वाढ़े उनकी देखभाल करते रहे, लेकिन रात के समय मदद के लिए आसपास कोई नहीं था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनकी तबीयत और बिगड़ती गई।
सुबह जब दिगंबर वाढ़े मदद के लिए घर से बाहर निकले तो संयोग से उसी समय नगर निगम की टीम इलाके में सर्वे कर रही थी। उन्होंने तुरंत स्थिति को समझते हुए मंजूला को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इससे पहले भी 43 वर्षीय अरविंद लिखार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई थी, लेकिन उसमें भी मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आ सका था। लगातार सामने आ रही ऐसी रिपोर्टों ने इस पूरे मामले को और अधिक रहस्यमय बना दिया है।
भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है। स्थानीय रहवासी लगातार आरोप लगा रहे हैं कि पाइपलाइन में गंदा और दूषित पानी आने के कारण ही बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े और कई लोगों की मौत हो गई। वहीं दूसरी ओर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब तक मौतों के कारण को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं रख पाए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव हासानी ने कई मामलों में दावा किया है कि मौतें दूषित पानी के कारण नहीं हुई हैं। हालांकि स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों का कहना है कि प्रशासन इस मामले में वास्तविक आंकड़ों और कारणों को छिपाने की कोशिश कर रहा है।
इलाके के लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता और शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद इतनी बड़ी संख्या में लोग बीमार नहीं पड़ते और कई जानें बचाई जा सकती थीं। फिलहाल पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट और माइक्रोबायोलॉजी जांच के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है। इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर भागीरथपुरा में हुई मौतों के पीछे दूषित पानी की भूमिका कितनी बड़ी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख तथ्य
पेट में करीब 100 मिलीलीटर पीला द्रव पाया गया।
लिवर, गालब्लैडर और स्प्लीन में कंजेशन पाया गया।
फेफड़े छाती की दीवार से चिपके हुए मिले।
हृदय का दाहिना भाग रक्त से भरा हुआ पाया गया।
दाईं किडनी का आकार छोटा पाया गया।
विसरा को केमिकल एनालिसिस के लिए सुरक्षित रखा गया है।
आंत का सैंपल कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजा गया है।