जबलपुर। तिरंगा यात्रा में राष्ट्रध्वज के कथित अपमान के मामले में मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को एमपी-एमएलए कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। विशेष न्यायाधीश डीपी सूत्रकार की अदालत ने मंत्री से पूछा है कि क्यों न उनके विरुद्ध राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के अपराध में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने का आदेश दिया जाए?
नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव निवासी कौशल द्वारा दायर परिवाद में आरोप लगाया गया है कि 11 अगस्त 2024 को गाडरवारा में आयोजित तिरंगा यात्रा के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अनादर किया गया। शिकायत के अनुसार मंत्री राव उदय प्रताप सिंह एक खुली जीप के बोनट पर बैठकर लोगों को संबोधित कर रहे थे और जीप के बोनट पर तिरंगा इस तरह बिछाया और लगाया गया था कि वह झुक रहा था तथा मंत्री के पैरों को स्पर्श कर रहा था। परिवादी के अनुसार घटना के बाद थाना गाडरवारा में शिकायत दी गई, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। बाद में पुलिस अधीक्षक नरसिंहपुर को भी कई बार लिखित शिकायत भेजी गई, पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद परिवादी ने सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) के फैसले का हवाला देते हुए न्यायालय की शरण ली।
मामले में प्रस्तुत तस्वीरें, वीडियो क्लिपिंग और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद मंत्री को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। परिवादी की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, प्रशांत अवस्थी, प्रशांत सिरमोलिया, विनीत टेहेनगुनिया, शुभम पाटकर, पंकज तिवारी और आनंद शुक्ला पैरवी कर रहे हैं।
परिवादी का दावा है कि राष्ट्रीय गौरव का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 2 के स्पष्टीकरण 4(जे) के तहत किसी भी वाहन के बोनट, छत या किसी अन्य भाग पर राष्ट्रीय ध्वज को इस प्रकार रखने या ढकने पर रोक है, जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो। यह संज्ञेय अपराध है और इसमें तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।