Delhi News :अवैध कब्जों पर सख्त एक्शन की तैयारी, DDA को दिए जीरो टॉलरेंस के निर्देश

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ आने वाले दिनों में बड़ा अभियान देखने को मिल सकता है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की एडवाइजरी काउंसिल की अहम बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध कब्जों के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाए। उन्होंने तकनीक के जरिए रियल टाइम निगरानी व्यवस्था विकसित करने और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में दिल्ली के भविष्य के विकास, ट्रैफिक व्यवस्था, पानी की उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
मास्टर प्लान में भविष्य की जरूरतों पर फोकस
बैठक के दौरान उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों को देखते हुए शहर का विकास योजनाबद्ध तरीके से होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आने वाले मास्टर प्लान में नागरिक सुविधाओं और संस्थागत ढांचे को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही DDA को निर्देश दिए गए कि जमीन और इमारतों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, ताकि अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माण का समय रहते पता लगाकर तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि दिल्ली की शहरी चुनौतियों का समाधान पारदर्शिता, तकनीक और सभी एजेंसियों के समन्वय से ही संभव है। उनका लक्ष्य राजधानी को ज्यादा व्यवस्थित, सुरक्षित और रहने योग्य शहर बनाना है।
आवास, पानी और ट्रैफिक को लेकर बनी नई रणनीति
बैठक में यह भी माना गया कि दिल्ली के सामने आवास की कमी, अनधिकृत कॉलोनियां, झुग्गी-बस्तियां, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और पानी की उपलब्धता जैसी समस्याएं बड़ी चुनौती हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए एक व्यापक विकास योजना तैयार की जा रही है, जिसमें किफायती आवास, पर्यावरण संरक्षण, बेहतर जीवन स्तर और सुगम परिवहन को प्राथमिकता दी गई है। योजना के तहत 1,400 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को विकास और पुनर्विकास के दायरे में लाया जाएगा। वहीं मेट्रो कॉरिडोर के आसपास लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की तैयारी है।
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यमुना रिवरफ्रंट और लैंड पूलिंग परियोजनाओं पर भी जोर
बैठक में लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के विकास और यमुना रिवरफ्रंट के लिए लगभग 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा अनधिकृत कॉलोनियों, पुराने शहर और झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि शहरी बाढ़, हीट आइलैंड प्रभाव, विरासत इमारतों के संरक्षण और पानी की कमी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। साथ ही मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट, बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी, ग्रीन कवर बढ़ाने, सुरक्षित सड़कें और आधुनिक व्यावसायिक बाजार विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि दिल्ली को भविष्य के अनुरूप एक बेहतर और व्यवस्थित राजधानी बनाया जा सके।












