वेनेजुएला के बाद अमेरिका कर सकता है क्यूबा पर हमला, सर्दन कमांड जांच रही कितनी है तैयारी

वॉशिंगटन। वेनेजुएला के बाद अमेरिका क्यूबा पर हमला कर सकता है। इसका खुलासा अमेरिकी मीडिया ने किया है। सीबीएस न्यूज के अनुसार US आर्मी रिर्जव इस बात की जांच कर रहा है कि क्या वह अगले चार महीनों में US सदर्न कमांड को किस तरह की मदद दे सकता है। इसमें मिलिट्री पुलिस, मेडिकल स्टाफ और दूसरी सपोर्ट यूनिट्स उपलब्ध कराना शामिल है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह क्यूबा के खिलाफ संभावित कार्रवाई से जुड़ी मिलिट्री प्लानिंग को तेज कर रहा है।
सेना के दस्तावेजों से सामने आई बात
CBS न्यूज द्वारा देखे गए आर्मी के एक इंटरनल मैसेज के बाद यह खुलासा हुआ है। CBS के अनुसार आर्मी रिजर्व छह तरह के फॉर्मेशन (यूनिट्स) की उपलब्धता की संभावना तलाश रहा है। इनमें मेडिकल, लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग और मिलिट्री पुलिस यूनिट्स शामिल हैं। अगर क्यूबा पर हमला किया जाता है तो इनकी जरूरत कम से कम 90 से 120 दिनों के भीतर पड़ सकती है।
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डॉक्यूमेंट में क्यूबा का सीधे जिक्र नहीं
हालांकि मैसेज में क्यूबा का जिक्र नहीं है, लेकिन कई US के अफसरों ने CBS न्यूज को जानकारी दी कि यह क्यूबा पर केंद्रित मिलिट्री प्लानिंग का हिस्सा है। इसके लिए जिन फॉर्मेशन का आकलन किया जा रहा है, उनमें ट्रांसपोर्टेशन, फ्यूल, मेंटेनेंस और सप्लाई जैसे लॉजिस्टिक्स के लिए कॉम्बैट सस्टेनमेंट सपोर्ट बटालियन , एक इंजीनियर बटालियन शामिल है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स की देखरेख के लिए एक एक्सपेडिशनरी सस्टेनमेंट कमांड शामिल हैं।
कितने सैनिक चाहिए साफ नहीं किया
CBS News ने जिस डॉक्यूमेंट की समीक्षा की है, उसमें यह नहीं बताया गया है कि कितने सैनिकों की जरूरत पड़ सकती है, उन्हें कहां तैनात किया जा सकता है। यह सैनिक कैसे ऑपरेशन में मदद करेंगे। जब US सदर्न कमांड से इस प्लानिंग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे ऐसी जानकारी नहीं देते हैं। कमांड ने कहा कि वे अपनी जिम्मेदारी वाले इलाके में संभावित जरूरतों का आकलन करने के लिए जॉइंट फोर्स के साथ तालमेल बैठाते हैं।
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पहले से सामने आ गए थे संकेत
इस साल की शुरुआत में अमेरिकी मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि अमेरिकी सेना ने क्यूबा के समुद्र तल और समुद्री रास्तों के आसपास टोही ऑपरेशन किए थे। वहीं US एयरपावर यूनिट्स को हाई अलर्ट पर रखा गया था और कर्मचारियों को संभावित तैनाती के लिए पहले से तैयार रहने का निर्देश दिया गया था। इस साल जुलाई में यह भी कहा गया था कि अमेरिकी मिलिट्री ने क्यूबा के खिलाफ संभावित कार्रवाई के लिए कई विकल्पों पर विचार किया था। इसमें हवाई हमला भी शामिल था।
खराब हो रहे हैं क्यूबा-अमेरिका के रिश्ते
यह प्लानिंग अमेरिका और क्यूबा के खराब होते रिश्तों के बीच हो रही है। ट्रंप प्रशासन क्यूबा में राजनीतिक बदलाव की मांग के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा है। अमेरिका ने क्यूबा के अधिकारियों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाना जारी रखा है। कुछ ही दिन पहले 17 सितंबर को अमेरिकी विदेश विभाग ने क्यूबा की 11 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए। इनमें क्यूबा के निकेल उद्योग से जुड़ी सरकारी कंपनियां और रिसर्च, हथियार प्रणालियों और नौसैनिक क्षमताओं से जुड़े सैन्य संगठन शामिल हैं।
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज ने कहा कि अमेरिकी कदमों ने ईंधन की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसने द्वीप पर लंबे समय तक बिजली कटौती की समस्या को बढ़ाया है। देश की सरकार ने कहा कि वॉशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। वैसे वह संपर्क बनाए रखने के लिए तैयार है।




















