7 दिन में खुलेगा होर्मुज? ईरान ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्तें, ट्रंप के फैसले पर टिकी नजर!

ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिन में खोलने का प्रस्ताव रखा है। इसके बदले तेहरान नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में राहत, युद्धविराम और फ्रीज संपत्तियां जारी करने की मांग कर रहा है। प्रस्ताव में लेबनान को भी युद्धविराम में शामिल करने की बात है। अमेरिका की ओर से इस योजना पर अंतिम जवाब आना बाकी है।
7 दिन में खुलेगा होर्मुज?  ईरान ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्तें, ट्रंप के फैसले पर टिकी नजर!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान


तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर बातचीत के केंद्र में आ गया है। ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को एक ऐसा प्रस्ताव भेजा है, जिसके तहत कुछ शर्तें मानने पर सात दिन के भीतर इस अहम समुद्री रास्ते को खोला जा सकता है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस योजना की जानकारी दी। प्रस्ताव में युद्ध रोकने, समुद्री नाकेबंदी हटाने और आर्थिक पाबंदियों में राहत जैसी मांगें शामिल हैं। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।

अमेरिका के सामने ईरान की क्या मांग?
ईरान का कहना है कि अमेरिका अगर उसकी प्रमुख शर्तों को स्वीकार करता है तो सात दिन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसके तहत ईरानी बंदरगाहों के आसपास लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी। साथ ही ईरान के तेल कारोबार पर लगी पाबंदियों में राहत देनी होगी। तेहरान ने अपने फ्रीज किए गए विदेशी खातों से कम से कम 12 अरब डॉलर जारी करने की मांग भी रखी है।

सातवें दिन खुलेगा होर्मुज
ईरानी प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका की मंजूरी मिलने के अगले दिन से समयसीमा शुरू होगी। सात दिन पूरे होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है। इसके साथ ही परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव है। ईरान का कहना है कि पहले समुद्री रास्ते और उससे जुड़े प्रतिबंधों का मुद्दा सुलझना चाहिए।

क्यों इतना अहम है होर्मुज?
होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल है। युद्ध से पहले वैश्विक तेल कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही रुकने या सीमित होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि ईरान के इस कदम को अमेरिका पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

जून के समझौते से जुड़ा है प्रस्ताव
ईरान का मौजूदा प्लान जून में हुए अमेरिका-ईरान समझौते से मिलता-जुलता बताया जा रहा है। उस व्यवस्था में युद्धविराम के दौरान आगे की बातचीत के लिए समय दिया गया था। तेल निर्यात में राहत और होर्मुज में सामान्य आवाजाही की चर्चा भी हुई थी। बाद में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

लेबनान और यमन पर स्थिति
ईरान के नए प्रस्ताव में लेबनान को युद्धविराम का हिस्सा बनाने की बात है, लेकिन यमन को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। कतर इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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