दतिया में BJP के प्रचार वाहन पर हमला!पोस्टर फाड़ने का आरोप; अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज

मध्य प्रदेश के दतिया जिले से विधानसभा उपचुनाव के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटना सामने आई है। यहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रचार वाहन पर हमला किए जाने और उसके पोस्टर-बैनर फाड़ने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि आजाद समाज पार्टी (ASP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की सभा से लौट रहे कुछ लोगों ने बीजेपी के प्रचार वाहन को निशाना बनाया और उस पर लगे प्रचार सामग्री को नुकसान पहुंचाया। हालांकि पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपों की पुष्टि के लिए सबूत जुटाए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना दतिया जिले के जिगना थाना क्षेत्र के उदगवां गांव की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, BJP का एक प्रचार वाहन चुनाव प्रचार के दौरान गांव में मौजूद था। इसी दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने वाहन पर लगे पोस्टर और बैनर फाड़ दिए। BJP की ओर से आरोप लगाया गया है कि यह हरकत आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना को अंजाम देने वाले लोग कौन थे और इसके पीछे क्या वजह थी।
पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही जिगना थाना पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चंद्रशेखर आजाद की सभा के बाद लगा आरोप
बीजेपी का दावा है कि यह घटना उस समय हुई, जब आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की सभा समाप्त होने के बाद उनके समर्थक वापस लौट रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से कुछ लोगों ने बीजेपी के प्रचार वाहन पर लगे पोस्टर और बैनर फाड़ दिए। हालांकि इस मामले में अभी तक आजाद समाज पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस भी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
दतिया में क्यों हो रहा है उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट पर इस समय उपचुनाव हो रहा है। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई थी। राजेंद्र भारती को एक धोखाधड़ी के मामले में सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई। इसके चलते निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव कराने की घोषणा की।
30 जुलाई को मतदान, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने पूरा कार्यक्रम पहले ही घोषित कर दिया है।
मतदान की तारीख: 30 जुलाई 2026
मतगणना: 3 अगस्त 2026
चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। लगातार जनसभाएं, रोड शो, घर-घर संपर्क अभियान और प्रचार वाहन के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
कौन हैं चुनाव मैदान में?
इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है। बीजेपी ने इस बार आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर नया चेहरा मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। दोनों दल इस सीट को प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं।
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, फिर भी प्रचार में जुटे
हालांकि बीजेपी ने इस बार नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया, लेकिन वे पार्टी के लिए लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाएं कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनाव अभियान को मजबूत बनाने में जुटे हैं। इससे साफ है कि पार्टी इस सीट को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती।
स्टार प्रचारकों ने संभाली कमान
दतिया उपचुनाव में बीजेपी ने अपने कई बड़े नेताओं को प्रचार की जिम्मेदारी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत कई वरिष्ठ नेता लगातार चुनावी सभाएं कर रहे हैं। पार्टी बूथ स्तर तक पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क साध रही है। विकास कार्यों और सरकार की योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है।
दूसरी ओर कांग्रेस भी पूरी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में है। पार्टी मोहल्ला बैठकों, घर-घर संपर्क अभियान और संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। कांग्रेस का प्रयास है कि वह इस सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखे।
क्यों अहम है दतिया उपचुनाव?
दतिया विधानसभा उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है। यह चुनाव दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा इसी सीट से हार गए थे। इस बार पार्टी ने उम्मीदवार बदलकर नया दांव खेला है। ऐसे में बीजेपी के लिए यह चुनाव अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने का मौका माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस के सामने भी इस सीट को बचाने की चुनौती है। अगर कांग्रेस यह सीट बरकरार रखती है तो इसे उसकी बड़ी राजनीतिक सफलता माना जाएगा।











