कोचिंग के नाम पर बच्चों की भीड़, बैठने तक की व्यवस्था नहीं! पथरिया में उठे सवाल

पथरिया। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के सरकारी दावों के बीच पथरिया में सुबह के समय संचालित हो रही कोचिंग कक्षाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यहां सुबह करीब 6 बजे बड़ी संख्या में बच्चे कोचिंग के लिए पहुंच रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन कक्षाओं का संचालन शासकीय स्कूलों के शिक्षकों द्वारा किया जा रहा है। बच्चों की संख्या अधिक होने के बावजूद मौके पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं नजर नहीं आने की बात सामने आई है।
कोचिंग के नाम पर भीड़, व्यवस्थाएं कम
सुबह-सुबह बड़ी संख्या में बच्चों के एक जगह पहुंचने से ऐसा लगता है जैसे कोई बड़ा शैक्षणिक आयोजन हो रहा हो। हालांकि, सवाल यह है कि अगर बच्चों की पढ़ाई में मदद के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जा रही हैं, तो क्या बच्चों की संख्या के अनुसार जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के लिए पर्याप्त जगह, बैठने की व्यवस्था, पेयजल और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
कोचिंग सेंटरों के रजिस्ट्रेशन पर भी सवाल
पथरिया में संचालित कोचिंग सेंटरों के पंजीयन और रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि कई कोचिंग सेंटरों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि शासकीय शिक्षक इन कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं, तो इसके लिए किस स्तर से अनुमति या व्यवस्था तय की गई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बच्चों को बुलाने का उद्देश्य क्या, निगरानी कौन करेगा?
सुबह 6 बजे बच्चों को बुलाने का उद्देश्य अगर उनकी पढ़ाई में मदद करना है, तो व्यवस्था भी उसी के अनुरूप होनी चाहिए। केवल बड़ी संख्या में बच्चों को एक जगह इकट्ठा कर देने से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं होती। अब सवाल यह है कि इन कक्षाओं की निगरानी कौन कर रहा है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया है या नहीं। साथ ही बच्चों की संख्या के अनुसार पर्याप्त कक्ष और सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, इसकी जांच भी जरूरी है।
SDM बोले- शिक्षा विभाग की टीम करेगी जांच
मामले को लेकर पथरिया SDM निकेत चौरसिया ने कहा कि इस संबंध में शिक्षा विभाग की टीम बनाकर जांच कराई जाएगी। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सुबह संचालित हो रही इन कक्षाओं के लिए क्या व्यवस्था और अनुमति है, कितने बच्चे इनमें शामिल हो रहे हैं और उनके लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।




















