बालाघाट में 30 बच्चों की मौत के दावे पर हाईकोर्ट सख्त, कहा-अखबार की खबर के आधार पर जनहित याचिका पर्याप्त नहीं

जबलपुर। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को बैहर और बिरसा जाकर जमीनी स्थिति देखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है, जिसके बाद ही PIL पर आगे सुनवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी।
अखबार की खबरों पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि सिर्फ मीडिया रिपोर्ट के आधार पर PIL दाखिल करना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने वास्तविक स्थिति की जांच करने को कहा।
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बालाघाट जाकर ग्राउंड रिपोर्ट देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को बैहर और बिरसा क्षेत्र का दौरा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वहां की ग्राउंड रियलिटी और उपलब्ध तथ्यों की पुष्टि कर रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है।
1 सितंबर को दाखिल हुई थी PIL
नरसिंहपुर के करेली निवासी अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने 1 सितंबर को जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में बैहर और बिरसा क्षेत्र में बीमारियों से 30 बच्चों की मौत का दावा किया गया है।
मलेरिया, खसरा से 30 बच्चों की मौत का दावा
याचिका में कहा गया है कि पिछले करीब ढाई महीने में खसरा, मलेरिया, चर्मरोग, डायरिया और कुपोषण जैसी बीमारियों से 30 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने का आरोप भी लगाया गया है।
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50 बेड के अस्पताल में 400 बच्चों का इलाज
याचिकाकर्ता के मुताबिक, 50 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में करीब 400 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। याचिका में स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर बताते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप और जरूरी निर्देश जारी करने की मांग की गई है।




















