MP का वो शहर जहां श्रीकृष्ण और शिव आमने-सामने आए थे, अब तीर्थ बनाने की मांग

सोहागपुर। मध्य प्रदेश का सोहागपुर धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में सोहागपुर को श्रोणितपुर के नाम से जाना जाता था और यह भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध की ससुराल थी। स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस क्षेत्र का संबंध भगवान श्रीकृष्ण, भगवान शिव और बाणासुर की कथा से भी जुड़ा हुआ है।
बाणासुर की तपस्या से प्रसन्न हुए थे भगवान शिव
पौराणिक कथा के मुताबिक, असुर राजा बाणासुर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे वरदान दिया था। मान्यता है कि इसके बाद भगवान शिव ने अपने परिवार और गणों के साथ यहां निवास किया था। कहा जाता है कि बाणासुर ने भगवान शिव की अध्यक्षता में इसी क्षेत्र से तीनों लोकों का शासन संचालित किया था।
अनिरुद्ध को लेकर हुआ था श्रीकृष्ण और शिव के बीच युद्ध
कथा के अनुसार, बाणासुर की बेटी उषा की सहेली चित्रलेखा अनिरुद्ध को यहां लेकर आई थी। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी सेना के साथ श्रोणितपुर पहुंचे। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव के बीच भीषण युद्ध हुआ। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव के कहने पर श्रीकृष्ण ने जृम्भणास्त्र का इस्तेमाल किया, जिससे बाणासुर की सेना निष्क्रिय हो गई। इसके बाद श्रीकृष्ण ने बाणासुर की हजार भुजाओं में से अधिकांश भुजाएं काट दीं और उसकी दो भुजाएं छोड़ दीं।
ऊषा और अनिरुद्ध का हुआ विवाह
युद्ध के बाद बाणासुर की बेटी ऊषा और अनिरुद्ध का विवाह हुआ। इसी वजह से सोहागपुर को भगवान श्रीकृष्ण के परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों में गिना जाता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि जमनी सरोवर और बाबई के पास मूढ़ापार में श्रीकृष्ण की सेना के पड़ाव से जुड़े अवशेष भी मिले हैं।
जमनी सरोवर का भी धार्मिक महत्व
सोहागपुर क्षेत्र में स्थित जमनी सरोवर को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि यह ऋषि जमदग्नि की तपोभूमि रही है। इसके अलावा पूरे नर्मदा क्षेत्र से कई अन्य धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
सोहागपुर को तीर्थ के रूप में विकसित करने की मांग
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े उन स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की बात कही है, जहां उनके चरण पड़े हैं। इसी घोषणा के आधार पर अब सोहागपुर के नागरिकों की मांग है कि सोहागपुर को भी धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध से जुड़ी पौराणिक मान्यता के साथ भगवान शिव के निवास की कथा भी जुड़ी है।
आध्यात्मिक पर्यटन की बड़ी संभावनाएं
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सोहागपुर और आसपास के नर्मदा क्षेत्र में भगवान सूर्य नारायण, अश्विनी कुमारों, माता सरस्वती, भगवान राम और माता सीता से जुड़ी धार्मिक कथाएं भी प्रचलित हैं। लोगों का मानना है कि यदि इन सभी धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को विकसित कर बेहतर सुविधाओं से जोड़ा जाए तो सोहागपुर एक बड़े आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर सकता है। इससे क्षेत्र में पर्यटन बढ़ने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।




















