Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

हिंदी दिवस पर अमित शाह का Gen Z को संदेश.. अपनी भाषा से शर्म कैसी? अपनी भाषा छोड़ना सबसे बड़ी भूल..!

14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन हिंदी के संवैधानिक महत्व और भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा को याद करने का अवसर है। गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस पर युवाओं और माता-पिता से अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुनिया की दूसरी भाषाएं सीखें लेकिन अपनी भाषा को कभी न भूलें।
 हिंदी दिवस पर अमित शाह का  Gen Z को संदेश.. अपनी भाषा से शर्म कैसी? अपनी भाषा छोड़ना सबसे बड़ी भूल..!
हिंदी दिवस 2026

नई दिल्ली। हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 में भी देशभर में स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और दूसरी जगहों पर हिंदी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस दिन का संबंध 14 सितंबर 1949 से है, जब संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। गृह मंत्री अमित शाह ने इस मौके पर हिंदी के साथ देश की सभी भाषाओं के सम्मान की बात कही। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे दूसरी भाषाएं जरूर सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा से दूरी न बनाएं।

अमित शाह बोले- भाषा हमारी पहचान है

अमित शाह ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी खासियत उसकी भाषाई विविधता है। देश में अलग-अलग भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं और हर भाषा अपने साथ इतिहास, संस्कृति और परंपराएं लेकर चलती है। उनके मुताबिक, अलग-अलग भाषाओं का होना कमजोरी नहीं, बल्कि भारत की ताकत है। भाषा सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं होती, बल्कि यह लोगों को उनकी जड़ों और पहचान से जोड़ती है।

Gen Z से बोले शाह- अपनी भाषा मत छोड़ना

हिंदी दिवस पर अमित शाह ने खास तौर पर युवाओं को संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवा दुनिया की जितनी भाषाएं सीख सकते हैं, सीखें, लेकिन अपनी भाषा को पीछे न छोड़ें। उन्होंने माता-पिता से भी बच्चों के साथ मातृभाषा में बातचीत करने की अपील की। शाह ने कहा कि अपनी भाषा बोलने में किसी को भी हीन भावना नहीं रखनी चाहिए।

अब PF का हिसाब WhatsApp पर! EPFO ने शुरू किया नया चैनल, घर बैठे मिलेंगी हर जानकारी

हिंदी को राष्ट्रभाषा कहना सही नहीं

हिंदी दिवस को लेकर एक सवाल अक्सर पूछा जाता है कि क्या हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है। इसका जवाब नहीं है। संविधान में हिंदी को राष्ट्रभाषा नहीं, बल्कि देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा का दर्जा मिला है। संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त है। इसलिए हिंदी का सम्मान करने के साथ दूसरी भारतीय भाषाओं की अहमियत को समझना भी जरूरी है।

14 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस?

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक फैसले की याद में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1953 से इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस मौके पर निबंध, भाषण, कविता, वाद-विवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

हिंदी के साथ दूसरी भाषाओं को आगे बढ़ाने की बात

अमित शाह ने कहा कि हिंदी का विकास दूसरी भारतीय भाषाओं के साथ होना चाहिए। उन्होंने हिंदी को देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों के बीच संवाद और संपर्क की महत्वपूर्ण भाषा बताया। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने में उन लोगों ने भी योगदान दिया, जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं थी।

हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस अलग हैं

हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है, जबकि विश्व हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को होता है। दोनों का उद्देश्य हिंदी के प्रचार-प्रसार से जुड़ा है, लेकिन उनकी ऐतिहासिक वजह अलग है। 10 जनवरी का संबंध 1975 में नागपुर में हुए पहले विश्व हिंदी सम्मेलन से है। वहीं 14 सितंबर का सीधा संबंध संविधान सभा के फैसले से है।

‘बारिश आ गई, कपड़े उतार लो’, सास की बात सून आगबबूला हुई बहू, महिला की मौत

डिजिटल दौर में हिंदी की नई पहचान

आज हिंदी का इस्तेमाल सिर्फ किताबों और अखबारों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, वेबसाइट, मोबाइल ऐप, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में भी हिंदी तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में हिंदी दिवस भाषा को याद करने के साथ उसके बदलते स्वरूप को समझने का भी मौका देता है। हिंदी के साथ भारत की सभी भाषाओं को बचाना और आगे बढ़ाना देश की भाषाई ताकत को मजबूत करता है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

Latest Posts