कनोरा में वन भूमि पर फिर फेंसिंग की कोशिश, वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर हटवाई जाली
दमोह। जिले के कनोरा ग्राम में वन भूमि पर अतिक्रमण की कोशिश का मामला एक बार फिर सामने आया है। सोमवार को वन भूमि पर फेंसिंग किए जाने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और लगाई गई फेंसिंग जाली को हटवा दिया। राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के आसपास की गई फेंसिंग को भी हटाया गया जिससे स्मारक तक पहुंचने का रास्ता फिर सुगम हो गया।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा वन अमला
फेंसिंग किए जाने की सूचना मिलते ही हटा रेंजर विकास सेठ के नेतृत्व में वन विभाग का अमला कनोरा पहुंचा। टीम ने मौके का निरीक्षण करने के बाद फेंसिंग जाली को अलग करवाया। वन विभाग की कार्रवाई के बाद स्मारक तक आने-जाने का रास्ता भी साफ हो गया। बताया गया कि वन भूमि पर पहले भी अस्थाई झोपड़ी बनाकर जमीन को खेती योग्य बनाने और कब्जा करने की कोशिश की गई थी। वन विभाग ने उस समय भी मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की थी।
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पहले भी हो चुकी है अतिक्रमण की कोशिश
कनोरा क्षेत्र में वन भूमि पर अस्थाई झोपड़ी बनाकर कब्जे की कोशिश का मामला पहले भी सामने आया था। उस दौरान राजस्व और पुलिस विभाग का अमला भी मौके पर मौजूद रहा था। रेंजर विकास सेठ के मुताबिक, वन विभाग को सूचना मिली थी कि कुछ बाहरी लोग वन भूमि पर कब्जे का प्रयास कर रहे हैं। संबंधित लोगों के पास जमीन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज या अधिकार नहीं पाए गए थे। वे वन भूमि को खेती योग्य बनाने की तैयारी कर रहे थे। बीट गार्ड की ओर से संबंधित लोगों को पहले भी वन भूमि पर कब्जा नहीं करने की समझाइश दी गई थी।
दूसरे जिलों से आने की जानकारी भी सामने आई
पिछली कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों के आधार कार्ड की जांच की गई थी। जांच में उनके आसपास के दूसरे जिलों से आने की जानकारी सामने आई थी। वन विभाग ने उस समय स्पष्ट किया था कि यदि क्षेत्र में अन्य लोगों ने भी वन भूमि पर कब्जा किया है तो उनके दस्तावेज और पट्टों की जांच की जाएगी। दस्तावेज सही नहीं पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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पीपुल्स समाचार की खबर के बाद हटाई गई स्मारक के पास की फेंसिंग
राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के समीप फेंसिंग किए जाने का मामला पीपुल्स समाचार ने 11 अगस्त के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर में बताया गया था कि फेंसिंग के कारण स्मारक तक पहुंचने में लोगों को परेशानी हो रही है। इसके बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए स्मारक के समीप की गई फेंसिंग को हटवा दिया। अब स्मारक तक पहुंचने का रास्ता पहले की तुलना में सुगम हो गया है।
एएसआई की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
कनोरा क्षेत्र में राष्ट्रीय महत्व का स्मारक होने के बावजूद उसके आसपास फेंसिंग किए जाने का मामला संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। खास बात यह है कि दमोह में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का उपमंडल कार्यालय भी संचालित है। इसके बावजूद स्मारक के आसपास फेंसिंग किए जाने की जानकारी समय रहते सामने नहीं आना चिंता का विषय माना जा रहा है। हालांकि वन विभाग की सक्रियता से न केवल वन भूमि पर दोबारा की जा रही फेंसिंग को हटाया गया, बल्कि स्मारक तक पहुंच का रास्ता भी बहाल हुआ।
दस्तावेजों की जांच कर रहा वन विभाग
वन विभाग अब क्षेत्र में भूमि से जुड़े दस्तावेजों और पट्टों की जानकारी जुटा रहा है। विभाग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं वन या शासकीय भूमि का अवैध कब्जे अथवा किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल तो नहीं किया जा रहा है।






















