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सीहोर में गेहूं खरीदी में गड़बड़ी की पुष्टि, नोटिस जारी; अब अंतिम कार्रवाई का इंतजार

दुर्ग के रावत वेयर हाउस में खरीदी बंद होने के बाद रात में गेहूं की बोरियां शिफ्ट करने का मामला सामने आया था। जांच में 284 बोरी कम मिलीं, फिर भी ढाई माह बाद अंतिम कार्रवाई का इंतजार है।
सीहोर में गेहूं खरीदी में गड़बड़ी की पुष्टि, नोटिस जारी; अब अंतिम कार्रवाई का इंतजार
गड़बड़ी की पुष्टि के बाद भी प्रशासन क्यों साधे है चुप्पी?

सीहोर। सीहोर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम दुर्ग स्थित भाजपा के एक रसूखदार नेता के रावत वेयर हाउस में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। खरीदी की समय-सीमा खत्म होने के बाद रात के अंधेरे में गेहूं की बोरियां शिफ्ट किए जाने का वीडियो सामने आने, जांच में स्टॉक में 284 बोरियां कम पाए जाने और संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किए जाने के बावजूद करीब ढाई माह बाद भी मामले में अंतिम कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और कार्रवाई की गति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

10 जून को अधिकारी ने कहा था-गड़बड़ी की पुष्टि हुई

मामले में वायरल वीडियो सामने आने के बाद 10 जून को उपार्जन अधिकारी आकाश चंदेल से जब जानकारी ली गई थी, तब उन्होंने बताया था कि जांच टीम द्वारा मामले की पड़ताल की गई है और गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। अधिकारी के अनुसार संबंधित वेयर हाउस संचालक और जिम्मेदार पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा था। उस समय माना जा रहा था कि जांच के बाद जल्द ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।

ढाई माह बाद बदला जवाब, अब अंतिम आदेश का इंतजार

करीब ढाई माह गुजरने के बाद जब मामले की अद्यतन स्थिति जानने के लिए उपार्जन अधिकारी से संपर्क किया गया तो बताया गया कि मामले से संबंधित जानकारी कलेक्टर को सौंप दी गई है। अधिकारी के अनुसार बीच में कुबेरेश्वर धाम का बड़ा आयोजन होने के कारण कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो सकी। अब वरिष्ठ अधिकारियों से जैसे निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

रात के अंधेरे में बोरियां शिफ्ट करने का आरोप

मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ गई थी क्योंकि समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीदी और तुलाई की निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद स्टॉक फ्रीज कर दिया जाता है। इसके बावजूद रावत वेयर हाउस में रात के समय गेहूं की बोरियां इधर-उधर किए जाने का आरोप सामने आया। स्थानीय लोगों ने कथित गतिविधि का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया था।

जांच में 284 बोरी कम मिलीं

सूत्रों के अनुसार बड़ी मात्रा में गेहूं के स्टॉक को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके बाद संबंधित टीम ने मौके पर पहुंचकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान शुरुआती तौर पर निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 284 बोरियां कम पाई गईं। इतनी बड़ी कमी सामने आने के बाद मामला महज कागजी विसंगति तक सीमित नहीं रहा और रिकॉर्ड तथा वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

सबसे बड़ा सवाल-आखिर रात में वेयर हाउस खुला कैसे?

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि जब खरीदी और तुलाई की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी तथा स्टॉक फ्रीज किया जा चुका था, तब रात के समय वेयर हाउस में गतिविधियां कैसे संचालित हुईं। यदि वेयर हाउस की चाबियां संबंधित निगम के सुपुर्द थीं, तो परिसर का ताला किसकी अनुमति से खोला गया? रात में वाहनों की आवाजाही किसकी जानकारी और अनुमति से हुई? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना अभी बाकी है।

क्या नियमों का शिकंजा सिर्फ किसानों और छोटे कारोबारियों पर?

मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। अन्य वेयर हाउस संचालकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य मामलों में प्रशासन तेजी से कार्रवाई करता है, लेकिन प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में कार्रवाई लंबी प्रक्रिया में अटक जाती है। हालांकि संबंधित पक्ष पर लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

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नोटिस का जवाब आया, अतिरिक्त साक्ष्य के लिए मांगा समय

उपार्जन अधिकारी  एएफओ आकाश चंदेल ने बताया कि रावतपुरा वेयर हाउस मामले में संबंधित प्राधिकारी के समक्ष पेशी की प्रक्रिया चल रही है। नोटिस का जवाब प्राप्त हो चुका है। संबंधित पक्ष ने कुछ अन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था। अधिकारी के अनुसार फिलहाल मामले में अंतिम आदेश होना बाकी है।

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अब कार्रवाई की तारीख पर टिकी निगाहें

करीब दो माह से चल रही जांच और कार्रवाई की प्रतीक्षा के बीच अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन मामले में अंतिम आदेश कब जारी करता है। गेहूं के स्टॉक में मिली 284 बोरियों की कमी, रात में वेयर हाउस संचालन और कथित तौर पर स्टॉक शिफ्टिंग जैसे गंभीर सवालों का जवाब कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल मामला जांच और प्रशासनिक निर्णय के बीच अटका हुआ है, जबकि जिले में सरकारी गेहूं खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे सवालों का जवाब जनता मांग रही है।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत्रि...Read More

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