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Raipur:छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की रेस में तोखन साहू का नाम सबसे आगे,सियासी गलियारों में तेज हुई हलचल

किरण देव के स्वास्थ्य और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाओं के बीच नए चेहरे पर मंथन, साहू समाज और OBC समीकरण से लेकर 2028 की तैयारी तक कई एंगल, नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू का नाम संभावित दावेदारों में चर्चा में है। साहू समाज और ओबीसी समीकरण, जमीनी राजनीतिक अनुभव और सरकार-संगठन के तालमेल को उनके पक्ष में अहम माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की रेस में तोखन साहू का नाम सबसे आगे,सियासी गलियारों में तेज हुई हलचल

रायपुर: छत्तीसगढ़ बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सियासी चर्चाओं का दौर तेज है। संगठन में संभावित बदलाव और नए नेतृत्व की तलाश के बीच केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री और बिलासपुर सांसद तोखन साहू का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में चर्चा में है। हालांकि, पार्टी हाईकमान की ओर से अब तक उनके नाम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं की गई है।

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प्रदेश अध्यक्ष कौन,दिल्ली से रायपुर तक बढ़ी निगाहें

छत्तीसगढ़ बीजेपी के संगठनात्मक बदलाव को लेकर पार्टी के भीतर मंथन की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम राजनीतिक गलियारों में घूम रहे हैं। इसी बीच तोखन साहू का नाम भी संभावित चेहरों में प्रमुखता से चर्चा में आया है। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए बीजेपी ऐसे चेहरे पर दांव लगाने की रणनीति बना सकती है, जिसकी स्वीकार्यता संगठन से लेकर आम कार्यकर्ताओं तक हो।

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साहू वोट बैंक पर BJP की नजर

छत्तीसगढ़ की राजनीति में ओबीसी वर्ग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। साहू समाज भी प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली सामाजिक समूहों में शामिल है। ऐसे में तोखन साहू को संगठन की बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की स्थिति में बीजेपी के सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति का संदेश जा सकता है। 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन के स्तर पर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बीजेपी के लिए अहम मुद्दा रहने वाला है। 

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पंच से केंद्रीय मंत्री तक,तोखन साहू का राजनीतिक सफर

तोखन साहू की राजनीतिक यात्रा जमीनी स्तर से शुरू हुई। पंचायत स्तर से राजनीति में सक्रिय होने के बाद उन्होंने लोरमी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विधायक और संसदीय सचिव की जिम्मेदारी संभालने के बाद वे बिलासपुर से लोकसभा सांसद बने और केंद्र की मोदी सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचे। यही राजनीतिक सफर उन्हें संगठन की बड़ी जिम्मेदारी के लिए संभावित चेहरों में शामिल किए जाने की एक वजह माना जा रहा है।

सरकार-संगठन के बीच तालमेल पर फोकस

बीजेपी में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल को हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के लिए ऐसा चेहरा तलाश सकती है, जिसकी संगठन में पकड़ हो और सरकार के साथ भी बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। तोखन साहू की जमीनी पृष्ठभूमि और वर्तमान केंद्रीय जिम्मेदारी को देखते हुए उनके नाम को इसी नजरिए से भी देखा जा रहा है।

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कई नाम चर्चा में, अंतिम फैसला हाईकमान के हाथ

प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर सिर्फ एक नाम की चर्चा नहीं है। बीजेपी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के तौर पर चर्चा में रहे हैं। ऐसे में तोखन साहू का नाम कितना आगे जाता है, यह पार्टी के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीजेपी सामाजिक समीकरण, संगठनात्मक अनुभव और सरकार-संगठन के तालमेल को ध्यान में रखते हुए तोखन साहू पर भरोसा जताएगी या किसी दूसरे अनुभवी चेहरे को प्रदेश की कमान सौंपेगी।

PREM

मै People's Updates रायपुर,छग में सीनियर कंटेंट राइटर के पद में कार्यरत हूँ।अपने पत्रकारिता करियर की...Read More

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