ओवरब्रिज पर सिर्फ तारीख पर तारीख, जनवरी से अगस्त आया; फिर भी जनता को नहीं मिली जाम से राहत
सीहोर। शहर के हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कभी जनवरी, फिर मार्च, मई, जुलाई और उसके बाद जून के अंत तक ब्रिज शुरू करने के दावे किए गए, लेकिन अब अगस्त भी गुजर चुका है और जनता को ओवरब्रिज की सुविधा नहीं मिल सकी है। निर्माण की समय-सीमा लगातार आगे खिसकने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जनवरी में शुरू होने का था दावा
हाउसिंग बोर्ड और फंदा रेलवे ओवरब्रिज को लेकर साल की शुरुआत में दावा किया गया था कि दोनों महत्वपूर्ण ब्रिज जनवरी 2026 में यातायात के लिए खोल दिए जाएंगे। बताया गया था कि निर्माण कार्य करीब 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है और अंतिम चरण का काम तेजी से चल रहा है। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी दोनों ब्रिज शुरू नहीं हो सके।
जून-जुलाई की समय-सीमा भी हुई पार
सामने आई जानकारी में ब्रिज कॉर्पोरेशन की नई समय-सीमा के अनुसार हाउसिंग बोर्ड ओवरब्रिज को जून के अंत और फंदा आरओबी को जुलाई में शुरू करने की बात कही गई थी। इसके बाद लोगों को उम्मीद जगी कि वर्षों से चली आ रही परेशानी अब खत्म होगी। मगर जून और जुलाई भी निकल गए और अगस्त में भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
तारीख बदली, परेशानी नहीं
ओवरब्रिज का निर्माण पूरा नहीं होने का सीधा असर शहर के लोगों पर पड़ रहा है। मुख्य मार्ग से आवागमन प्रभावित होने के कारण वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है। खासकर हाउसिंग बोर्ड और आसपास के इलाकों में पीक टाइम पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है और जाम की स्थिति बनती है।
बायपास का चक्कर बढ़ा रहा समय और खर्च
भोपाल की ओर आने-जाने वाले हजारों वाहन चालकों को कई बार सैकड़ाखेड़ी और बायपास की ओर से लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे वाहन चालकों का अतिरिक्त समय और ईंधन दोनों खर्च हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ओवरब्रिज समय पर शुरू हो जाता तो रोजाना की इस परेशानी से काफी हद तक राहत मिल सकती थी।
28 करोड़ का ब्रिज, फिर भी इंतजार
हाउसिंग बोर्ड रेलवे ओवरब्रिज की लागत करीब 28 करोड़ रुपए बताई गई है। इसकी लंबाई लगभग 700 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है। ब्रिज में 24 पिलर बनाए गए हैं और रेलवे ट्रैक से इसकी ऊंचाई करीब 7.30 मीटर है। इतने बड़े प्रोजेक्ट के अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद यातायात शुरू नहीं होने से अब निर्माण की समय-सीमा पर सवाल उठ रहे हैं।
कर्व वाली डिजाइन भी सवालों के घेरे में
हाउसिंग बोर्ड आरओबी की डिजाइन को लेकर पहले से ही स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। नीचे उतरते समय निजी भूमि की स्थिति के कारण ब्रिज में कर्व दिए जाने की बात सामने आई थी। रहवासियों ने दोनों तरफ पर्याप्त एप्रोच और सर्विस रोड को लेकर भी आपत्तियां जताई थीं। अब लोगों की मांग है कि ब्रिज शुरू करने से पहले इसकी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की पूरी तरह समीक्षा की जाए।
फंदा आरओबी भी तय समय से आगे
फंदा रेलवे ओवरब्रिज की लागत करीब 29 करोड़ रुपए बताई गई है। इसकी लंबाई भी लगभग 700 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है तथा इसमें 21 पिलर बनाए गए हैं। इस प्रोजेक्ट को जुलाई में शुरू करने का दावा किया गया था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
तीन रेलवे फाटकों से मिलेगी राहत
इन ओवरब्रिजों के निर्माण का प्रमुख उद्देश्य रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं की समस्या को कम करना है। भोपाल-रतलाम रेलवे ट्रैक के फाटक क्रमांक 104, 107 और 108 पर यातायात का दबाव लंबे समय से बना रहता है। दोनों आरओबी शुरू होने के बाद रेलवे क्रॉसिंग पर रुकने और जाम में फंसने की समस्या से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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जनता पूछ रही..अब अगली तारीख कौन सी?
लगातार बदलती समय-सीमा ने अब लोगों के भरोसे को भी प्रभावित किया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर कुछ महीने में नई तारीख बताने के बजाय जिम्मेदार एजेंसी को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि निर्माण कब तक पूरा होगा और यातायात वास्तव में किस तारीख से शुरू किया जाएगा। जनता अब केवल घोषणा नहीं, ओवरब्रिज पर वाहनों की आवाजाही शुरू होते देखना चाहती है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
ओवरब्रिज की देरी को लेकर स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी बढ़ रही है। नागरिकों का कहना है कि वीआईपी और जनप्रतिनिधि बायपास के रास्ते निकल जाते हैं, लेकिन रोजाना इसी मार्ग से गुजरने वाली आम जनता जाम, डायवर्जन और खराब सड़कों की परेशानी झेल रही है। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जिम्मेदार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कब गंभीर होंगे।
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अब तारीख नहीं, काम पूरा होने का इंतजार
हाउसिंग बोर्ड आरओबी को लेकर जनवरी से शुरू हुई तारीखों की कहानी जून, जुलाई पार करते हुए अगस्त तक पहुंच गई है। हर नई समय-सीमा के साथ जनता की उम्मीद भी जुड़ी लेकिन राहत अब तक नहीं मिली। ऐसे में लोगों की मांग साफ है कि अब नई तारीख नहीं चाहिए, ब्रिज पूरा चाहिए और उस पर यातायात शुरू चाहिए। ब्रिज कॉर्पोरेशन भोपाल के सब इंजीनियर कैलाश वर्मा के अनुसार ओवरब्रिज और फंदा ब्रिज का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। केवल अप्रोच रोड पर डामरीकरण बाकी है, जो बारिश के कारण रुका हुआ है। मौसम साफ होते ही डामर का काम पूरा कर सितंबर तक ब्रिज चालू कर दिया जाएगा।






















