कोरोना वायरस महामारी ने साल 2020-21 में दुनियाभर में भारी तबाही मचाई थी। लाखों लोग इसकी चपेट में आए और कई लोगों की मौत भी हुई। बाद में वैज्ञानिकों ने तेजी से वैक्सीन तैयार की, जिससे संक्रमण पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया। पिछले करीब एक साल से हालात सामान्य लगने लगे थे और लोगों ने मास्क पहनना भी कम कर दिया था। लेकिन अब कोरोना का एक नया वैरिएंट सामने आने से फिर चिंता बढ़ने लगी है।
वैज्ञानिकों ने कोरोना के एक नए वैरिएंट BA.3.2 की पहचान की है, जिसे ‘सिकाडा’ (Cicada) नाम दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस खुद को जीवित रखने के लिए लगातार म्यूटेशन करता रहता है और नए वैरिएंट बनाता है। इसी कारण समय-समय पर कोरोना के नए स्ट्रेन सामने आते रहते हैं।
अमेरिका की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नया वैरिएंट पिछले कुछ महीनों से धीरे-धीरे फैल रहा था। अब अमेरिका और दुनिया के कई हिस्सों में इसके मामले बढ़ने लगे हैं। यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की 19 मार्च की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि इस वैरिएंट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसे ‘वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग’ की सूची में शामिल किया है। अब तक यह वैरिएंट करीब 20 देशों में पाया जा चुका है और कुछ जगहों पर कुल मामलों के लगभग 30% तक के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
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सीडीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, BA.3.2 वैरिएंट में यह क्षमता हो सकती है कि यह पहले हुए संक्रमण या वैक्सीनेशन से मिली इम्युनिटी को भी चकमा देकर लोगों को संक्रमित कर दे। पिछले एक-दो साल में कोरोना के मामले कम होने के कारण कई जगहों पर वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी हो गई है। ऐसे में लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
नेशनल फाउंडेशन फॉर इन्फेक्शियस डिजीज के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. रॉबर्ट हॉपकिंस जूनियर के अनुसार, इस वैरिएंट की पहचान सबसे पहले जून 2025 में अमेरिका आए एक यात्री में हुई थी। दुनिया में इसका पहला मामला नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस वैरिएंट में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे पहले के स्ट्रेन से अलग बनाते हैं।
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मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए वैरिएंट के लक्षण काफी हद तक पहले जैसे ही हैं। संक्रमित लोगों में ये समस्याएं देखी जा रही हैं-
फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह वैरिएंट पहले के मुकाबले कितना गंभीर है। हालांकि सावधानी बरतना और सतर्क रहना जरूरी है।